Home » Politics » LDF में घमासान: CPI-M में बढ़ी तकरार, IUML ने CPI को दिया साथ का संकेत

LDF में घमासान: CPI-M में बढ़ी तकरार, IUML ने CPI को दिया साथ का संकेत

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | तिरुवनंतपुरम | 29 अगस्त 2026

केरल के सत्ता गठबंधन में खुली कलह

केरल की सियासत में वाम मोर्चे के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF के दो प्रमुख घटक दल CPI और CPI(M) के बीच विवाद अब केवल विधानसभा के एक पद तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसकी आंच दोनों दलों की विचारधारा, राजनीतिक इतिहास और विरासत तक पहुंच गई है। डिप्टी लीडर ऑफ अपोजिशन के पद को लेकर शुरू हुई तनातनी के बीच दोनों ओर से पुराने राजनीतिक अध्याय खोले जा रहे हैं और एक-दूसरे की नीयत तथा राजनीतिक विरासत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML ने CPI के पक्ष में जिस तरह का राजनीतिक संकेत दिया है, उसने LDF के भीतर की बेचैनी को और बढ़ा दिया है।

IUML ने CPI को बताया असली कम्युनिस्ट धारा

IUML के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष K.P.A. मजीद ने पार्टी के मुखपत्र चंद्रिका में CPI की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उसके प्रति खुलकर सहानुभूति जताई। उन्होंने CPI को वास्तविक कम्युनिस्ट आदर्शों से जुड़ा दल बताते हुए कहा कि LDF के भीतर उसे CPI(M) के सामने अधीन भूमिका निभानी पड़ रही है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दोनों वाम दलों के बीच विधानसभा में डिप्टी लीडर ऑफ अपोजिशन के पद को लेकर टकराव चल रहा है। मजीद ने सी. अच्युत मेनन के नेतृत्व वाली सरकारों का भी उल्लेख किया और याद दिलाया कि उस दौर में CPI ने कांग्रेस और IUML के साथ मिलकर सरकार चलाई थी। उनके मुताबिक उस दौर की नीतियों ने आगे चलकर केरल मॉडल के विकास की नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ALSO READ  क्यूबा पर अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट हुए रूस-चीन: राउल कास्त्रो पर कार्रवाई से बढ़ा वैश्विक टकराव

अब सवाल सिर्फ पद का नहीं, राजनीतिक पहचान का है

CPI और CPI(M) के बीच बढ़ती तनातनी का सबसे बड़ा संकेत यह है कि बहस अब वर्तमान से निकलकर इतिहास में पहुंच गई है। CPI के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने CPI(M) के राज्य सचिवालय सदस्य C.N. मोहनन की आलोचनाओं का जवाब देते हुए CPI(M) के पुराने राजनीतिक रुख पर सवाल उठाया। विश्वम ने 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में CPI(M) द्वारा कथित तौर पर अत्यंत दक्षिणपंथी दलों के साथ राजनीतिक तालमेल का मुद्दा उठाया। साफ है कि अब दोनों दल यह साबित करने की कोशिश में हैं कि कम्युनिस्ट विचारधारा की असली विरासत किसके पास है और किसने अपने राजनीतिक सिद्धांतों से समझौते किए।

डिप्टी लीडर पद बना बड़े टकराव की वजह

विधानसभा में डिप्टी लीडर ऑफ अपोजिशन का पद मौजूदा विवाद की तत्काल वजह है, लेकिन इसके पीछे LDF के भीतर लंबे समय से चले आ रहे शक्ति संतुलन का सवाल भी दिखाई देता है। CPI(M) LDF की सबसे बड़ी ताकत है और CPI अपेक्षाकृत छोटी सहयोगी पार्टी है। ऐसे में पद और राजनीतिक सम्मान से जुड़ा विवाद CPI की उस बेचैनी को सामने ला रहा है, जिसमें वह अपने स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व और पुराने योगदान को ज्यादा मजबूती से स्थापित करना चाहती है। अब मामला केवल यह नहीं रह गया है कि कौन सा पद किसे मिलेगा; सवाल यह भी बन गया है कि गठबंधन में किस दल की राजनीतिक आवाज कितनी प्रभावशाली होगी।

अच्युत मेनन के दौर की याद क्यों दिलाई गई?

IUML नेता K.P.A. मजीद द्वारा अच्युत मेनन के दौर का उल्लेख भी मौजूदा राजनीतिक माहौल में खासा महत्वपूर्ण है। उन्होंने उस समय CPI, कांग्रेस और IUML के बीच हुए राजनीतिक सहयोग को केरल के विकास से जोड़ते हुए उसकी प्रशंसा की। यह इतिहास इसलिए फिर चर्चा में आया है क्योंकि इससे CPI को CPI(M) से अलग एक राजनीतिक पहचान के साथ पेश करने की कोशिश दिखाई देती है। संदेश साफ है—CPI का इतिहास केवल CPI(M) के अधीन चलने वाली राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पास अपनी अलग राजनीतिक विरासत और सत्ता संचालन का अनुभव भी है।

ALSO READ  झारखंड में छात्रों की जीत, सरकार के फैसले से मचा नया बवाल: JSSC-CGL रद्द, 2 हजार नौकरियों पर संकट; देवेंद्र महतो बोले—लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई

बिनॉय विश्वम का पलटवार, पुराने पन्ने खुले

CPI के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने CPI(M) की आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए पुराने राजनीतिक घटनाक्रम सामने रख दिए। उन्होंने 1970 के दशक की शुरुआत का संदर्भ देकर CPI(M) के कथित राजनीतिक समझौतों पर सवाल उठाया। इस पलटवार ने विवाद को और तीखा कर दिया है। जिस बहस की शुरुआत वर्तमान राजनीतिक पद को लेकर हुई थी, वह अब इस सवाल तक पहुंच गई है कि इतिहास में किस पार्टी ने किसके साथ खड़े होकर अपनी विचारधारा को कमजोर किया और किसने अपने राजनीतिक सिद्धांतों को कायम रखा।

IUML के बयान ने बढ़ाई हलचल

IUML की ओर से CPI के प्रति दिखाई गई सहानुभूति को सामान्य राजनीतिक बयान मानकर खारिज करना आसान नहीं होगा। चंद्रिका में CPI की राजनीतिक स्थिति को लेकर लिखे गए लेख ने LDF की आंतरिक राजनीति को एक नया कोण दे दिया है। हालांकि IUML ने किसी नए गठबंधन या राजनीतिक पाला बदलने की घोषणा नहीं की है, लेकिन CPI को CPI(M) के दबाव से बाहर निकलने की सलाह जैसा संकेत निश्चित रूप से केरल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वाम गठबंधन के दोनों प्रमुख दल खुद एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से निशाना साध रहे हैं।

क्या वाम एकता में दरार गहरी होगी?

LDF की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उसकी एकजुटता रही है। लेकिन जब गठबंधन के दो प्रमुख दल सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के इतिहास और विचारधारा पर सवाल उठाने लगें, तो स्वाभाविक रूप से गठबंधन की आंतरिक मजबूती पर सवाल उठते हैं। फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक टूट या गठबंधन परिवर्तन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी ने यह जरूर दिखा दिया है कि CPI और CPI(M) के बीच सब कुछ सहज नहीं चल रहा। आने वाले दिनों में विवाद शांत होता है या और भड़कता है, यह केरल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा।

ALSO READ  कांग्रेस : देश में ‘अडानी’ का नाम लेना हुआ अपराध, मोदी सरकार लोकतंत्र पर रोजाना कर रही हमला

केरल में नई राजनीतिक पटकथा के संकेत?

फिलहाल तस्वीर साफ है—CPI अपने पुराने गौरव और स्वतंत्र पहचान को सामने ला रही है, CPI(M) के नेता इसका जवाब दे रहे हैं और IUML ने CPI के प्रति राजनीतिक सहानुभूति जताकर पूरे विवाद में तीसरा कोण जोड़ दिया है। यदि यह टकराव आगे भी इसी तरह सार्वजनिक रूप से जारी रहा तो इसका असर सिर्फ एक पद या कुछ नेताओं की बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। यह LDF के भीतर शक्ति संतुलन, नेतृत्व और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी असर डाल सकता है। केरल की वाम राजनीति में फिलहाल सवाल यही है—क्या यह महज अंदरूनी खींचतान है या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार हो रही है?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted