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सरकारों से CJP की दो टूक: शिक्षा को ‘आपात प्राथमिकता’ बनाएं, सरकारी स्कूलों का डेटा दें

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 अगस्त 2026

सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कॉकroach Janta Party (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने सोमवार को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखा। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की रिक्तियों और उपलब्ध फंड से जुड़ा राज्यवार डेटा मांगा है।

दिपके ने अपने पत्र में शिक्षा को सरकारों की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो गंभीर चिंता पैदा करते हैं। उनका सवाल है कि जब बच्चों को पढ़ाई के लिए पीने का पानी, उचित कक्षाएं और दूसरी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, तो उनसे बेहतर शिक्षा और देश के भविष्य की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

सरकारी स्कूलों की तस्वीरों पर उठाए सवाल

दिपके ने सोशल मीडिया पर सामने आ रही सरकारी स्कूलों की तस्वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों को देखकर नागरिकों को गंभीरता से सवाल उठाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से स्कूलों में पीने के पानी, कार्यशील कक्षाओं, शौचालय, पर्याप्त शिक्षकों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाया।

उन्होंने शिक्षा मंत्रियों से सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षक पदों की रिक्तियों और शिक्षा के लिए उपलब्ध तथा खर्च किए जा रहे फंड की जानकारी भी शामिल है।

‘बच्चे ऐसी परिस्थितियों में कैसे पढ़ेंगे?’

दिपके ने सवाल उठाया कि यदि बच्चों को पढ़ने के लिए आवश्यक न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तो उनसे देश की प्रगति में योगदान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

उन्होंने सरकारों से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए तत्काल और व्यापक स्तर पर काम करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय तत्काल प्राथमिकता के रूप में लिया जाना चाहिए।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जोड़ा मुद्दा

CJP पिछले दिनों से सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘School Thik Karo’ अभियान चला रहा है। अभियान के तहत दिपके ने महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।

20 अगस्त को लातूर के औसा क्षेत्र में एक जिला परिषद स्कूल का दौरा करने के बाद उन्होंने स्कूलों में कक्षाओं, बेंच, शौचालय, सुरक्षित पहुंच मार्ग और पेयजल जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व को स्कूलों की स्थिति के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की थी।

इससे पहले दिपके ने शिक्षा मंत्रियों और अधिकारियों से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अपील भी की थी। उनका तर्क था कि यदि निर्णय लेने वाले लोग स्वयं सरकारी स्कूलों की व्यवस्था से सीधे जुड़ेंगे, तो स्कूलों की समस्याओं को दूर करने का दबाव और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगे।

CJP का फोकस अब स्कूलों पर

CJP की गतिविधियां हाल के दिनों में परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ सरकारी शिक्षा व्यवस्था की ओर भी बढ़ी हैं। संगठन ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर देशव्यापी अभियान की बात कही है।

दिपके का ताजा पत्र इसी अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें राज्यों से आंकड़े मांगकर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने और सरकारों को जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है।

सवाल सिर्फ स्कूलों का नहीं, बच्चों के भविष्य का

सरकारी स्कूल देश के उन लाखों बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख माध्यम हैं जिनके परिवार निजी स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते। ऐसे में स्कूलों में शिक्षक, कक्षाएं, पेयजल, शौचालय और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा सवाल है।

CJP का कहना है कि सरकारों को शिक्षा पर तत्काल ध्यान देना चाहिए और स्कूलों की कमियों को दूर करने के लिए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। दिपके ने सभी राज्यों से स्कूलों की स्थिति, शिक्षक रिक्तियों और फंड से संबंधित जानकारी साझा करने की मांग की है।

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