अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 21 अगस्त 2026
मिसाइलों के बीच सैन्य अभ्यास पर ब्रेक
उत्तर कोरिया की ओर से करीब 10 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के ठीक एक दिन बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपना बड़ा सालाना सैन्य अभ्यास Ulchi Freedom Shield (UFS) तय समय से करीब छह दिन पहले खत्म करने का फैसला किया है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर कोरिया लंबे समय से इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ हमले की तैयारी बताता रहा है। ऐसे में मिसाइल परीक्षण के तुरंत बाद अभ्यास को खत्म करना कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्योंगयांग इस नरमी को स्वीकार करेगा?
ट्रंप ने पहले ही कम कर दिया था अभ्यास का दायरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभ्यास शुरू होने से ठीक पहले पेंटागन को Ulchi Freedom Shield का दायरा काफी कम करने का आदेश दिया था। ट्रंप ने इसके पीछे उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का हवाला दिया था। इसके साथ ही ईरान युद्ध भी अमेरिका की सैन्य प्राथमिकताओं पर असर डाल रहा है। मूल कार्यक्रम के मुताबिक यह अभ्यास 17 से 27 अगस्त तक चलना था, लेकिन अब इसे 21 अगस्त को ही समाप्त किया जा रहा है। यानी अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने तय कार्यक्रम से लगभग छह दिन पहले ही सैन्य अभ्यास खत्म करने का फैसला किया है।
आक्रामक ट्रेनिंग भी हटाई गई
इस बार केवल अभ्यास की अवधि ही कम नहीं की गई, बल्कि इसके सैन्य स्वरूप में भी बड़ा बदलाव किया गया। अभ्यास के दूसरे चरण में होने वाली जवाबी कार्रवाई और आक्रामक ऑपरेशन की ट्रेनिंग को हटा दिया गया। बटालियन स्तर या उससे ऊपर के 14 प्रस्तावित फील्ड अभ्यासों में से सात को ही रखा गया, जबकि बाकी को बाद के लिए टाल दिया गया। कुछ लाइव-फायर अभ्यासों को सिमुलेशन में बदला गया या रद्द कर दिया गया। हालांकि दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का कहना है कि इससे दोनों देशों की जरूरी सैन्य तैयारी और युद्ध क्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
उत्तर कोरिया को अमेरिका की नरमी मंजूर नहीं
अमेरिका और दक्षिण कोरिया की ओर से अभ्यास का आकार और अवधि घटाए जाने के बावजूद उत्तर कोरिया का रुख नहीं बदला। किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने कहा कि केवल अभ्यास छोटा करने से उसकी कथित आक्रामक प्रकृति खत्म नहीं होती। उन्होंने ट्रंप के साथ किम जोंग उन के अच्छे संबंधों के दावे पर भी सवाल उठाया। यानी वॉशिंगटन की तरफ से नरमी के संकेत के बावजूद प्योंगयांग फिलहाल बातचीत की मेज पर लौटने के लिए तैयार दिखाई नहीं दे रहा है।
मिसाइलों से उत्तर कोरिया का जवाब
तनाव के बीच गुरुवार को उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग क्षेत्र से पूर्वी समुद्र की तरफ करीब 10 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के मुताबिक इन मिसाइलों ने लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय की। दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने इसके बाद उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस घटनाक्रम पर आपात बैठक की।
अमेरिका ने तत्काल खतरा नहीं माना
मिसाइल परीक्षण के बावजूद अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने कहा कि इन प्रक्षेपणों से अमेरिकी क्षेत्र या उसके सहयोगियों के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं था। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। लेकिन मिसाइल परीक्षण ने साफ कर दिया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखने वाला है।
ईरान युद्ध ने भी बदली अमेरिका की प्राथमिकता
इस पूरे घटनाक्रम में ईरान युद्ध की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका पहले से ही मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों में उलझा हुआ है। ऐसे में कोरियाई प्रायद्वीप में बड़े सैन्य अभ्यास को छोटा करना अमेरिकी सैन्य संसाधनों और प्राथमिकताओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन एक तरफ ईरान पर ध्यान दे रहा है, तो दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के साथ पुराने तनाव को बातचीत के जरिए कम करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है।
क्या ट्रंप की किम नीति काम करेगी?
डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच पहले भी बातचीत हो चुकी है और ट्रंप उत्तर कोरिया के नेता के साथ अपने रिश्तों को सकारात्मक बताते रहे हैं। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम बताता है कि केवल व्यक्तिगत संबंधों के भरोसे प्योंगयांग को अपनी परमाणु और मिसाइल नीति बदलने के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा। उत्तर कोरिया लगातार अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है और अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन पर दबाव बनाए हुए है।
असली चुनौती—शांति भी, सुरक्षा भी
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का अभ्यास जल्दी खत्म करना तनाव कम करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा का सवाल भी जुड़ा है। अगर उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण जारी रखता है और सैन्य दबाव बनाए रखता है, तो अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सामने चुनौती होगी कि बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए अपनी सैन्य तैयारी भी कमजोर न होने दें।
फिलहाल तस्वीर साफ है—अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सैन्य अभ्यास छोटा कर दिया, लेकिन उत्तर कोरिया ने मिसाइलों से अपना जवाब दे दिया। अब देखना यह है कि यह कदम कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने की शुरुआत बनता है या अगले टकराव से पहले की सिर्फ एक छोटी सी खामोशी।




