राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026
सोनिया गांधी की आत्मकथा “Belonging: A Journey of Love” 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। किताब में प्रेम, निजी त्रासदियां, नेहरू-गांधी परिवार में विवाह, राजनीति में प्रवेश और सरकार में उनकी भूमिका के साथ उस दौर की कहानी भी सामने आएगी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार किया था।
प्रेम से सत्ता के गलियारों तक—सोनिया की अनकही कहानी अब किताब में
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी अब अपनी जिंदगी के उन अध्यायों को किताब के जरिए सामने रखने जा रही हैं, जिनमें निजी जीवन, परिवार, राजनीति और सत्ता के बेहद संवेदनशील दौर जुड़े हुए हैं। प्रकाशक Alfred A. Knopf के मुताबिक उनकी संस्मरणात्मक पुस्तक “Belonging: A Journey of Love” 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। किताब में सोनिया गांधी नेहरू-गांधी राजनीतिक परिवार में विवाह के बाद बदली अपनी जिंदगी, निजी सुख-दुख, राजनीतिक परिस्थितियों और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका को लेकर अपने अनुभव साझा करेंगी। यह किताब इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सोनिया गांधी लंबे समय तक अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखती रही हैं।
‘दर्द और नुकसान ने मुझे राजनीति में धकेला’—सोनिया का बड़ा बयान
सोनिया गांधी के मुताबिक उनके जीवन में आए heartbreak और loss ने उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति की दुनिया में धकेला। उन्होंने कहा कि इससे पहले वह अपनी निजता की बेहद मजबूती से रक्षा करती थीं। यह बयान उनकी राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए बेहद अहम है। जिस महिला ने शुरुआत में राजनीति से दूरी बनाए रखी, वही आगे चलकर कांग्रेस की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हुईं और करीब दो दशक तक पार्टी की कमान संभाली। उनकी किताब अब उस निजी बदलाव की कहानी बताएगी, जिसमें पारिवारिक जीवन की सीमाओं से निकलकर वह देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक के केंद्र में पहुंचीं।
नेहरू-गांधी परिवार में शादी—सिर्फ रिश्ता नहीं, बदल गई पूरी जिंदगी
सोनिया गांधी की कहानी सिर्फ एक राजनीतिक परिवार में विवाह की कहानी नहीं है। यह उस दौर की भी कहानी है जब एक विदेशी मूल की युवती भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली परिवार का हिस्सा बनीं। पुस्तक में वह इस विवाह से जुड़े अनुभवों और इसके बाद उनके जीवन में आए बदलावों पर प्रकाश डालेंगी। नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत, सार्वजनिक जीवन का दबाव और परिवार के सदस्यों से जुड़े बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों ने उनकी निजी जिंदगी को भी गहराई से प्रभावित किया। यही वजह है कि इस संस्मरण को सिर्फ एक राजनीतिक किताब नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभवों और भारतीय राजनीति के कई निर्णायक दौर को जोड़ने वाली पुस्तक के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीति में अनिच्छा से प्रवेश, फिर कांग्रेस की सबसे ताकतवर नेता
सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन के केंद्र में ला खड़ा किया। बाद में उन्होंने कांग्रेस का नेतृत्व संभाला और पार्टी को कई महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर से गुजारा। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में वापसी की और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी UPA के दौर में वह सत्ता के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में शामिल रहीं। अब उनकी किताब यह बताने का अवसर देगी कि सत्ता के इस पूरे दौर को उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर कैसे देखा और महसूस किया।
प्रधानमंत्री पद का प्रस्ताव और फिर ऐतिहासिक इनकार
सोनिया गांधी की राजनीतिक यात्रा का सबसे चर्चित अध्याय 2004 के बाद का दौर रहा, जब कांग्रेस के नेतृत्व में UPA को सत्ता मिली और प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे आगे था। लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। यह फैसला भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित राजनीतिक निर्णयों में गिना जाता है। उनकी आने वाली किताब में इस निर्णय के पीछे की सोच और उस समय की परिस्थितियों पर उनका दृष्टिकोण विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। वर्षों बाद सोनिया गांधी खुद उस दौर को किस तरह याद करती हैं और प्रधानमंत्री पद से दूरी बनाने के पीछे व्यक्तिगत तथा राजनीतिक कारण क्या थे—यह सवाल किताब को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता पैदा कर रहा है।
सत्ता से ज्यादा रिश्ते, जिम्मेदारियां और राजनीतिक विरासत
“Belonging: A Journey of Love” के शीर्षक से भी संकेत मिलता है कि किताब केवल सत्ता और राजनीति का दस्तावेज नहीं होगी। इसमें belonging यानी अपनापन, रिश्तों और भावनात्मक जुड़ाव को भी केंद्रीय स्थान दिया गया है। सोनिया गांधी की सार्वजनिक छवि अक्सर राजनीतिक फैसलों, कांग्रेस संगठन और सत्ता के समीकरणों के आसपास देखी गई है, लेकिन उनकी किताब उनके व्यक्तित्व के उस हिस्से को सामने ला सकती है जो राजनीति की चमक-दमक से दूर रहा है।
किताब का इंतजार इसलिए भी—क्योंकि कहानी खुद सोनिया गांधी की जुबानी होगी
सोनिया गांधी से जुड़ी राजनीतिक कहानी पर पिछले वर्षों में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन इस संस्मरण की अहमियत इस बात में है कि इसमें घटनाओं को उनकी अपनी नजर से देखने का दावा किया गया है। प्रेम, परिवार, व्यक्तिगत त्रासदी, राजनीति में प्रवेश, कांग्रेस नेतृत्व और प्रधानमंत्री पद से जुड़े फैसले—इन सभी विषयों को एक ही जीवन-कथा में जोड़ने की कोशिश होगी। 10 नवंबर को किताब के प्रकाशित होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी भारतीय राजनीति के उन निर्णायक वर्षों को किस भाषा और किस नजरिए से याद करती हैं, जिन्होंने न केवल उनकी जिंदगी बल्कि देश की राजनीति की दिशा भी बदल दी।




