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CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को NDA का ऑफर, केंद्रीय मंत्री बोले—आएं, अंबेडकर के सपने को आगे बढ़ाएं

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026

NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके अब सीधे सत्ता की राजनीति के रडार पर हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दिपके को अपनी पार्टी Republican Party of India (A) में शामिल होने का खुला न्योता दिया है और कहा है कि उन्हें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सपने को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति में आना चाहिए। RPI(A), BJP-led NDA का हिस्सा है। यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस आंदोलनकारी चेहरे ने NEET परीक्षा व्यवस्था, शिक्षा और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की, उसी चेहरे को अब सत्ता पक्ष से राजनीतिक मंच का प्रस्ताव मिला है। हालांकि दिपके ने अभी इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और वह पहले भी चुनावी राजनीति में प्रवेश से इनकार करते हुए CJP को राजनीतिक दल के बजाय जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आंदोलन से निकला यह युवा चेहरा सत्ता की राजनीति में जाएगा या सत्ता से दूरी बनाकर व्यवस्था पर दबाव बनाने का रास्ता ही चुनेगा?

NEET आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान, अब सत्ता की नजर में दिपके

अभिजीत दिपके की राष्ट्रीय पहचान पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP और छात्र आंदोलन के बाद तेजी से बढ़ी। NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन केवल छात्रों की नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही पर बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा किया। आंदोलन के दौरान CJP की मांगों और दिपके की भूमिका ने उन्हें एक ऐसे युवा चेहरे के रूप में स्थापित किया, जो सीधे चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय सड़क पर आंदोलन के जरिए व्यवस्था को चुनौती दे रहा था। इसी दौर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस आंदोलन की राजनीतिक अहमियत पर चर्चा और तेज हुई। अब केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की ओर से दिपके को अपनी पार्टी में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने से साफ है कि CJP के इस आंदोलनकारी चेहरे को केवल एक प्रदर्शनकारी के रूप में नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक प्रभाव वाले युवा चेहरे के रूप में भी देखा जा रहा है।

अठावले का सीधा संदेश—दिपके राजनीति में आएं, समाज और पार्टी मजबूत करें

रामदास अठावले ने दिपके को RPI(A) में शामिल होने पर विचार करने को कहा है। उन्होंने दिपके को युवा और सक्रिय बताते हुए कहा कि उन्हें पार्टी में आकर समाज को मजबूत करने के साथ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सपने को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए। राजनीतिक रूप से देखें तो यह सिर्फ किसी युवा आंदोलनकारी को पार्टी में शामिल होने का सामान्य निमंत्रण नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब दिपके सरकार के सामने सवाल खड़े करने वाले आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। सत्ता पक्ष के एक केंद्रीय मंत्री द्वारा उन्हें सीधे राजनीतिक मुख्यधारा में आने का प्रस्ताव देना बताता है कि आंदोलन से पैदा हुए जनसमर्थन और युवा प्रभाव को राजनीतिक मंच में बदलने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। हालांकि अठावले के प्रस्ताव को फिलहाल दिपके की ओर से स्वीकार किए जाने या अस्वीकार किए जाने का कोई संकेत नहीं मिला है।

दिपके का पुराना रुख—चुनाव नहीं, जनआंदोलन

लेकिन दिपके की अब तक की राजनीति इस प्रस्ताव से बिल्कुल अलग रही है। वह पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि CJP का उद्देश्य एक और राजनीतिक पार्टी खड़ी करना नहीं है। उनका तर्क रहा है कि जनता का भरोसा राजनीतिक दलों और चुनावी व्यवस्था से कमजोर हुआ है और देश को एक और चुनावी पार्टी से ज्यादा एक मजबूत जनआंदोलन की जरूरत है। दिपके ने राजनीति, न्यायपालिका, चुनाव व्यवस्था और मीडिया पर लोगों के घटते भरोसे का सवाल भी उठाया है। उनका कहना रहा है कि यदि लोगों की समस्याओं को लेकर एक प्रभावी जनदबाव बनाया जा सकता है तो उसके लिए चुनाव लड़ना जरूरी नहीं है। यही कारण है कि अठावले का प्रस्ताव अब दिपके के लिए सिर्फ व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि CJP की पूरी दिशा तय करने वाला फैसला बन सकता है। अगर वह सत्ता पक्ष के साथ जाते हैं तो आंदोलन की प्रकृति बदल सकती है और अगर वह प्रस्ताव को ठुकराते हैं तो CJP एक स्वतंत्र जनदबाव समूह के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।

सरकार का दूसरा संदेश—गलत करने वालों को सजा मिलेगी

अठावले ने दिपके को राजनीतिक निमंत्रण देने के साथ यह भी कहा कि सरकार गलत करने वालों को सजा देने में विश्वास रखती है। NEET-UG विवाद की पृष्ठभूमि में यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि CJP और छात्र आंदोलन का मूल सवाल ही परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़ा रहा है। आंदोलनकारियों ने लगातार मांग की कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे में एक तरफ सरकार की ओर से आंदोलन के प्रमुख चेहरे को राजनीतिक मुख्यधारा में आने का निमंत्रण और दूसरी तरफ गलत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात—दोनों संदेश एक साथ सामने आए हैं। इससे राजनीतिक संदेश यह भी निकलता है कि सत्ता पक्ष आंदोलन के प्रभाव को पूरी तरह नजरअंदाज करने के बजाय उसके प्रमुख चेहरे को अपने राजनीतिक दायरे में लाने की संभावना को खुला रखना चाहता है।

सत्ता का ऑफर या आंदोलन की स्वतंत्रता—दिपके के सामने असली परीक्षा

अब असली परीक्षा अभिजीत दिपके की है। उनके सामने एक तरफ NDA के घटक दल के केंद्रीय मंत्री का खुला प्रस्ताव है, तो दूसरी तरफ उनका अपना घोषित राजनीतिक रास्ता है, जिसमें चुनावी राजनीति से दूरी और जनआंदोलन को प्राथमिकता दी गई है। प्रस्ताव स्वीकार करने की स्थिति में दिपके को राजनीतिक मंच, संगठन और चुनावी राजनीति में प्रवेश का रास्ता मिल सकता है, लेकिन इसके साथ CJP की मौजूदा स्वतंत्र पहचान और सरकार के खिलाफ सवाल उठाने की भूमिका पर भी सवाल खड़े होंगे। वहीं प्रस्ताव अस्वीकार करने पर दिपके यह संदेश दे सकते हैं कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल या सत्ता के साथ समझौते के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव और जनता के मुद्दों के लिए है। इसलिए दिपके का अगला बयान केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं होगा—वह CJP के भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी होगा।

‘School Thik Karo’—NEET से आगे अब सरकारी स्कूलों पर फोकस

इसी बीच दिपके ने शिक्षा के मुद्दे को NEET से आगे ले जाने की कोशिश भी शुरू कर दी है। उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अपने गांव से ‘School Thik Karo’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, ग्रामीण विद्यार्थियों की समस्याओं और निजी स्कूलों की फीस जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। दिपके का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूल लंबे समय से उपेक्षा का सामना कर रहे हैं और गांव के बच्चों को उन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है जो बड़े शहरों में विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं। उन्होंने अभिभावकों और सरपंचों से स्कूलों की स्थिति सुधारने को सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में लेने की अपील की है। इससे यह संकेत मिलता है कि CJP का एजेंडा केवल NEET विवाद तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा व्यवस्था के व्यापक सवालों तक फैलाने की कोशिश की जा रही है।

सड़क से सत्ता तक—क्या बदलेगा CJP का रास्ता?

अभिजीत दिपके के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आंदोलन की ऊर्जा को किस दिशा में ले जाया जाए। एक रास्ता चुनावी राजनीति का है, जहां किसी स्थापित गठबंधन के साथ जुड़कर सीधे सत्ता की प्रक्रिया का हिस्सा बना जा सकता है। दूसरा रास्ता स्वतंत्र जनआंदोलन का है, जहां सत्ता में शामिल हुए बिना सरकार से सवाल पूछे जाएं और जनता के मुद्दों पर दबाव बनाया जाए। तीसरा रास्ता यह भी हो सकता है कि CJP राजनीतिक दल बने बिना विभिन्न सामाजिक और शिक्षा संबंधी मुद्दों पर देशव्यापी दबाव समूह के रूप में अपनी भूमिका बढ़ाए। अठावले के प्रस्ताव ने इस बहस को अचानक और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है।

अब गेंद दिपके के पाले में—फैसला सिर्फ उनका नहीं, CJP का भी

फिलहाल दिपके ने NDA के इस प्रस्ताव पर कोई फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन इतना तय है कि NEET आंदोलन से निकला एक युवा चेहरा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में चर्चा का विषय बन चुका है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अभिजीत दिपके राजनीति में आएंगे या नहीं; बड़ा सवाल यह है कि अगर सत्ता उन्हें अपने साथ आने का रास्ता दिखाती है, तो क्या वह सत्ता के भीतर जाकर बदलाव की कोशिश करेंगे या सत्ता के बाहर रहकर सत्ता से सवाल पूछने की अपनी भूमिका जारी रखेंगे। अठावले का प्रस्ताव CJP के लिए एक बड़ा राजनीतिक मोड़ है। अब दिपके का जवाब तय करेगा कि Cockroach Janta Party की लड़ाई सड़क से संसद तक पहुंचेगी, या वह सत्ता से स्वतंत्र रहकर एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेगी।

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