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‘100% प्योर’ का दावा अब नहीं चलेगा! FSSAI की सख्ती, डाबर समेत कंपनियों को बदलने होंगे लेबल

'100% प्राकृतिक' और '100% शुद्ध' जैसे दावों पर FSSAI की आपत्ति; कहा—ऐसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उत्पाद असुरक्षित हैं

स्वास्थ्य/ बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 अगस्त 2026

अगर आप किसी खाद्य उत्पाद पर “100% Pure”, “100% Natural” या “100% Organic” लिखा देखकर उसे बिना सोचे-समझे खरीद लेते हैं, तो अब आपको थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ऐसे दावों पर सख्त रुख अपनाया है और डाबर सहित कई कंपनियों को अपने उत्पादों से “100%” वाले दावे हटाने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि FSSAI ने यह कहीं नहीं कहा है कि डाबर का शहद, घी, नारियल दूध या अन्य उत्पाद असुरक्षित, मिलावटी या खराब गुणवत्ता के हैं। नियामक की आपत्ति सिर्फ उन दावों पर है जो उत्पाद को “पूरी तरह शुद्ध” या “100% प्राकृतिक” बताकर उपभोक्ताओं के मन में ऐसी धारणा बना सकते हैं, जिसका कोई स्पष्ट कानूनी या वैज्ञानिक आधार नहीं है।

समस्या ‘100%’ शब्द से है, उत्पाद से नहीं

FSSAI का कहना है कि भारतीय खाद्य नियमों में “100% Pure” या “100% Natural” जैसे शब्दों की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। ऐसे में कंपनियां इन शब्दों का इस्तेमाल करके उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिला सकती हैं कि उनका उत्पाद बाकी सभी उत्पादों से बेहतर या पूरी तरह शुद्ध है, जबकि ऐसा दावा साबित करने के लिए कोई निर्धारित मानक मौजूद नहीं है।

यही वजह है कि मई 2025 में FSSAI ने सभी खाद्य कंपनियों को सलाह जारी कर ऐसे दावों से बचने को कहा था। अब इस सलाह को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

उपभोक्ताओं को क्या समझना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी पैकेट पर “100% शुद्ध” लिखा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह उत्पाद पोषण के लिहाज से सबसे बेहतर है। किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता उसके पोषक तत्वों, निर्माण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और लेबल पर दी गई सही जानकारी से तय होती है, केवल आकर्षक दावों से नहीं।

लेबल पढ़ें, दावों पर नहीं, तथ्यों पर भरोसा करें

FSSAI का उद्देश्य कंपनियों को दंडित करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों और अतिशयोक्तिपूर्ण दावों से बचाना है। अब कंपनियों को अपने उत्पादों का सही और तथ्यात्मक विवरण देना होगा, ताकि ग्राहक जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें, न कि केवल मार्केटिंग के प्रभाव में।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खाद्य उत्पादों की लेबलिंग में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब उपभोक्ताओं को भी किसी उत्पाद को खरीदते समय केवल “100% प्योर” या “100% नेचुरल” जैसे दावों पर भरोसा करने के बजाय उसकी सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और FSSAI मानकों को ध्यान से देखना चाहिए।

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