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हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग की नई वजह, ईरान-अमेरिका संघर्ष के दूसरे चरण की असली कहानी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 19 जुलाई 2026

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब एक नए और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। संघर्ष का दूसरा चरण लगभग पूरी तरह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर केंद्रित हो गया है। यही समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

14 जून को दोनों पक्षों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत ईरान ने 60 दिनों तक जहाजों को बिना किसी शुल्क के हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने देने पर सहमति जताई थी। साथ ही यह भी तय हुआ था कि ईरान और ओमान मिलकर भविष्य में इस समुद्री मार्ग के प्रशासन और समुद्री सेवाओं की नई व्यवस्था तय करेंगे।

हालांकि, समझौते के महज दो दिन बाद ईरान द्वारा गठित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए। इनमें कहा गया कि अब हर जहाज के लिए इस प्राधिकरण से ट्रांजिट परमिट लेना और PGSA से स्वीकृत बीमा कराना अनिवार्य होगा। फिलहाल इन सेवाओं के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन भविष्य में शुल्क लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस कदम के जरिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी प्रशासनिक और कानूनी भूमिका स्थापित करना चाहता है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो गई। हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक गतिविधियों को निशाना बनाने के दावे किए हैं।

समुद्री व्यापार से जुड़ी कई वैश्विक शिपिंग कंपनियां अब इस संभावना को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रही हैं कि भविष्य में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी यह टकराव आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका संघर्ष की दिशा तय कर सकता है। यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए लंबे समय तक चुनौती बना रह सकता है।

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