राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 जुलाई 2026
केंद्र सरकार ने संसद के आगामी मानसून सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा जारी कर दिया है। सरकार ने इस सत्र में पेश किए जाने वाले पांच नए विधेयकों की सूची संसद सदस्यों के साथ साझा की है। हालांकि, लंबे समय से चर्चा में रहे लोकसभा परिसीमन (Delimitation) विधेयक और उससे जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों का इस सूची में कोई उल्लेख नहीं है। इससे विपक्ष के उन दावों पर फिलहाल विराम लग गया है, जिनमें मानसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही थी।
सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को इस सत्र में पेश करेगी, उनमें सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इस विधेयक के जरिए ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान जानबूझकर अपमान करने या व्यवधान उत्पन्न करने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव है। यदि यह कानून पारित होता है, तो राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े प्रावधान पहली बार स्पष्ट रूप से कानूनी दायरे में आ जाएंगे।
यह विधेयक राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन करेगा। अभी यह कानून मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान से संबंधित प्रावधानों को कवर करता है। नए संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान को भी कानूनी संरक्षण देने की कोशिश की जाएगी।
सरकार द्वारा सूचीबद्ध दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक है। इसमें जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी होने पर अधिक सख्त प्रावधान लाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करने से नागरिक रिकॉर्ड अधिक सटीक और विश्वसनीय बनेंगे तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता आएगी।
सबसे अधिक ध्यान इस बात पर गया कि सरकार की विधायी सूची में 130वां और 131वां संविधान संशोधन विधेयक शामिल नहीं हैं।
130वें संविधान संशोधन विधेयक का उद्देश्य ऐसे किसी भी जनप्रतिनिधि, जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी शामिल हों, को सार्वजनिक पद से स्वतः अयोग्य ठहराना था, यदि वह किसी मामले में 30 दिन या उससे अधिक समय तक जेल में रहे।
वहीं, 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव था। इसे महिलाओं के लिए संसद में आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़कर देखा जा रहा था। हाल के दिनों में दक्षिण भारत के कई राज्यों और विपक्षी दलों ने परिसीमन को लेकर अपनी आशंकाएं सार्वजनिक रूप से व्यक्त की थीं। ऐसे में इस विधेयक का एजेंडा में शामिल न होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन दोनों संवैधानिक संशोधन विधेयकों को बाद में लाया जाएगा या नहीं। लेकिन फिलहाल जारी विधायी कार्यक्रम से संकेत मिलता है कि मानसून सत्र में सरकार का फोकस प्रशासनिक सुधारों, नागरिक रिकॉर्ड व्यवस्था और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों पर रहेगा।
संसद का आगामी मानसून सत्र कई राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों के कारण पहले से ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता, अर्थव्यवस्था, महंगाई, विदेश नीति और विभिन्न राज्यों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है। ऐसे में परिसीमन विधेयक का एजेंडा से बाहर रहना राजनीतिक चर्चाओं का एक बड़ा विषय बन सकता है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि क्या सरकार सत्र के दौरान अपने विधायी कार्यक्रम में कोई बदलाव करती है या परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधनों को किसी अगले सत्र के लिए टाल दिया जाता है।




