राष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 23 जून 2026
‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच उद्धव का बड़ा हमला
महाराष्ट्र की राजनीति में “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मुंबई के भांडुप में आयोजित जनसभा में उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने लगभग तीन दशकों तक कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष किया, लेकिन कांग्रेस ने कभी उनके नेताओं को तोड़ने या पार्टी को खत्म करने की कोशिश नहीं की। इसके विपरीत, जिस बीजेपी के साथ शिवसेना ने लंबे समय तक गठबंधन निभाया और उसे महाराष्ट्र में मजबूत बनाने में भूमिका निभाई, उसी ने सत्ता के लिए शिवसेना को तोड़ दिया। उद्धव ने बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा कि क्या किसी को पता है कि BJP का अध्यक्ष कौन है? नहीं। एक दिन कांग्रेस का कोई व्यक्ति बीजेपी का अध्यक्ष बनेगा। उन्होंने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की बात कही थी, लेकिन अब यह ‘BJP युक्त कांग्रेस’ हो गई है।
“जब BJP को कोई नहीं पूछता था…”
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा, “हमने 30 साल तक कांग्रेस से लड़ाई लड़ी, लेकिन उसने कभी हमारे नेताओं को चुराने या शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की। जब बीजेपी को सड़क पर कोई पूछता तक नहीं था, तब हमने उसका हाथ पकड़कर उसे बड़ा किया। आज वही बीजेपी शिवसेना को खत्म करने में लगी हुई है।”
उद्धव का यह बयान ऐसे समय आया है जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि उनका बहुचर्चित “ऑपरेशन टाइगर” सफल हो गया है और शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद उनके संपर्क में हैं। हाल के दिनों में उद्धव गुट के सांसदों और नेताओं के शिंदे खेमे में जाने की अटकलों ने महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया है।
बागी नेताओं पर भी साधा निशाना
उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता के वोट और शिवसैनिकों की मेहनत के दम पर जीतने वाले कुछ नेता सत्ता और पद के लिए विचारधारा से समझौता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर ऐसे लोगों को जवाब मिलेगा।
भांडुप की सभा में उद्धव ने मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों को पार्टी ने पहचान दी, वही आज पार्टी के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दलबदल नहीं बल्कि जनादेश के साथ विश्वासघात है।
2022 से शुरू हुआ संकट
उद्धव ठाकरे ने अप्रत्यक्ष रूप से 2022 में हुए शिवसेना विभाजन का भी जिक्र किया। उस समय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे, जिसके बाद महाविकास आघाड़ी सरकार गिर गई थी। बाद में चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह भी शिंदे गुट को आवंटित कर दिया।
अब लोकसभा सांसदों और संगठन के अन्य नेताओं के संभावित पलायन की खबरों ने उद्धव गुट की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल नेताओं के आने-जाने का मामला नहीं बल्कि बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत पर नियंत्रण की लड़ाई है।
कार्यकर्ताओं से संघर्ष जारी रखने की अपील
सभा में उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को भावनात्मक संदेश देते हुए कहा कि शिवसेना की ताकत किसी चुनाव चिन्ह, पद या सत्ता में नहीं बल्कि लाखों शिवसैनिकों में है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में भी शिवसैनिक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच जाने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है बल्कि यह एक नई लड़ाई की शुरुआत है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
उद्धव ठाकरे के इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और शिवसेना की विरासत को लेकर जारी संघर्ष के संदर्भ में देखा जा रहा है। एक ओर शिंदे गुट “ऑपरेशन टाइगर” की सफलता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे भावनात्मक और वैचारिक मुद्दों को केंद्र में रखकर अपने समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर इस टकराव का सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना बनाम शिवसेना की लड़ाई एक नए और निर्णायक दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है।




