राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 22 जून 2026
शिक्षा के केंद्र में मचा मौत का तांडव
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को एक ऐसी हृदयविदारक त्रासदी की गवाह बनी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। अलीगंज क्षेत्र के सेक्टर-डी स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी इमारत धुएं तथा लपटों की चपेट में आ गई। जिस भवन में छात्र अपने भविष्य के सपने संजो रहे थे, वहीं कुछ ही देर में चीख-पुकार, भगदड़ और मातम का माहौल छा गया।
इस भयावह हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई छात्र और कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में अधिकांश युवा छात्र बताए जा रहे हैं। हादसे ने न केवल लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया है।
पेट शॉप से शुरू हुई आग, कुछ ही देर में तीन मंजिलें चपेट में
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग इमारत के भूतल पर स्थित एक पेट शॉप में लगी। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के बाद लगी चिंगारी ने देखते ही देखते पूरी दुकान को आगोश में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में उसने ऊपर स्थित गेमिंग जोन, लाइब्रेरी, एनीमेशन सेंटर और कोचिंग संस्थान को अपनी चपेट में ले लिया।
घटना के समय भवन में बड़ी संख्या में छात्र, कर्मचारी और अन्य लोग मौजूद थे। धुएं के घने गुबार और तेज लपटों के कारण लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
“बच्चे जान बचाने के लिए नीचे कूद रहे थे”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद इमारत में अफरा-तफरी मच गई। कई छात्र ऊपरी मंजिलों पर फंस गए और जान बचाने के लिए खिड़कियों तथा छत की ओर दौड़ पड़े। कुछ बच्चों ने नीचे कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश की।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में लोगों को मदद के लिए पुकारते और धुएं से भरी इमारत से बाहर निकलने की कोशिश करते देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घटना का मंजर इतना भयावह था कि उसे देखकर हर कोई सन्न रह गया।
दीवार तोड़कर निकाले गए छात्र
राहत एवं बचाव कार्य के दौरान प्रशासन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आग और धुएं के कारण मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर पहुंचना मुश्किल हो गया था। ऐसे में बचाव दलों ने इमारत की पिछली दीवार तोड़कर अंदर फंसे छात्रों और कर्मचारियों को बाहर निकाला।
दमकल विभाग की कई गाड़ियां, पुलिस, प्रशासन और राहत दल घंटों तक मौके पर डटे रहे। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
21 से अधिक बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में हादसे के बाद 21 से अधिक बच्चों और युवाओं को लाया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार 18 लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं।
डॉक्टरों की विशेष टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है। कुछ घायलों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, सहायता राशि का एलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिवार को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए प्रशासन को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) को स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री अपने अलीगढ़ दौरे के कार्यक्रमों को बीच में छोड़कर लखनऊ लौट आए और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी शुरू कर दी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर कोचिंग सेंटरों, निजी शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण मौजूद थे? क्या आपातकालीन निकास मार्ग उपलब्ध थे? और क्या नियमित सुरक्षा निरीक्षण किए गए थे?
प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित संचालकों और अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पूरे प्रदेश में शोक की लहर
लखनऊ की इस दर्दनाक त्रासदी ने पूरे उत्तर प्रदेश को शोक में डुबो दिया है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
जिस इमारत में बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर पहुंचे थे, वही कुछ ही मिनटों में मातम का केंद्र बन गई। यह हादसा केवल 18 लोगों की मौत नहीं, बल्कि अनेक परिवारों की उम्मीदों, सपनों और भविष्य का भी दर्दनाक अंत है।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह बताएगी कि आखिर इस भयावह त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।




