राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 13 जून 2026
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के लिए बड़ा राजनीतिक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छोड़कर अलग-अलग दल बनाने वाले सभी नेताओं को फिर से एक मंच पर आना चाहिए और कांग्रेस को मजबूत करना चाहिए। राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार से इस दिशा में पहल करने की अपील करते हुए कहा कि यदि भाजपा की “विकृत राजनीति” का मुकाबला करना है तो विपक्ष को अपनी पुरानी गलतियों को भुलाकर एकजुट होना होगा।
राउत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस को “डूबता हुआ जहाज” बताते हुए कहा था कि कोई भी समझदार व्यक्ति उसमें सवार नहीं होगा। फडणवीस के इस बयान पर पलटवार करते हुए राउत ने कहा कि कांग्रेस कभी डूबता हुआ जहाज नहीं रही और आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस से डरते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की राजनीति का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस का मजबूत होना देश और लोकतंत्र दोनों के लिए जरूरी है।
पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा कि यदि वास्तव में भाजपा की राजनीति के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़नी है तो सभी विपक्षी दलों और नेताओं को एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि जो नेता वर्षों पहले कांग्रेस छोड़कर अलग-अलग राजनीतिक दलों में चले गए, उन्हें फिर से एकजुट होकर राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विपक्ष तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। राउत ने कहा कि यदि इस अभियान की शुरुआत शरद पवार जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता करें तो इसका व्यापक असर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) एक क्षेत्रीय पार्टी है, लेकिन वह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ मजबूती से खड़ी है। राउत के अनुसार भाजपा के खिलाफ संघर्ष केवल चुनावी लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं की रक्षा का अभियान है, जिसके लिए व्यापक विपक्षी एकता की आवश्यकता है।
इस दौरान उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में कथित असंतोष और चर्चित “ऑपरेशन टाइगर” पर भी प्रतिक्रिया दी। राउत ने कहा कि “ऑपरेशन टाइगर” जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल भाजपा नेतृत्व कई बार कर चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को तोड़ने की कोशिश लोकतंत्र की विकृति को दर्शाती है और यह स्वस्थ राजनीतिक परंपराओं के खिलाफ है।
राउत ने कहा कि वर्तमान भाजपा नेतृत्व के दौर में यह प्रवृत्ति अपने चरम पर पहुंच गई है, लेकिन लोकतंत्र में ऐसी राजनीति हमेशा नहीं चल सकती। उन्होंने दावा किया कि एक समय ऐसा आएगा जब देश और राज्यों में इस प्रकार की राजनीति के खिलाफ व्यापक जनविरोध देखने को मिलेगा।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने निर्वाचन आयोग पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल देश के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। हालांकि भाजपा और चुनाव आयोग पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार बता चुके हैं।
राउत के इस बयान को विपक्षी राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और बिहार तक बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच विपक्षी दलों में एकजुटता की चर्चा तेज है। ऐसे में कांग्रेस छोड़कर गए नेताओं की संभावित घर वापसी और विपक्षी पुनर्गठन को लेकर राउत की अपील राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है।




