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30 साल का इंतज़ार खत्म: बोरिस बेकर के बाद अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जीता पहला ग्रैंड स्लैम खिताब

खेल | ABC NATIONAL NEWS | पेरिस | 8 जून 2026

जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने आखिरकार ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का अपना वर्षों पुराना सपना पूरा कर लिया। फ्रेंच ओपन 2026 के पुरुष एकल फाइनल में ज्वेरेव ने इटली के युवा खिलाड़ी फ्लावियो कोबोली को पांच सेटों तक चले रोमांचक मुकाबले में 6-1, 4-6, 6-4, 6-7(5), 6-1 से हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया। रोलां गैरोस के लाल मिट्टी वाले कोर्ट पर मिली यह जीत न केवल उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है, बल्कि जर्मन टेनिस इतिहास में भी एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

लगातार कई वर्षों से ग्रैंड स्लैम जीतने की कोशिश कर रहे ज्वेरेव को इससे पहले तीन बार फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। दो वर्ष पहले फ्रेंच ओपन के फाइनल में भी वह ट्रॉफी के बेहद करीब पहुंचकर चूक गए थे। आलोचक अक्सर उन पर बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने में असफल रहने का आरोप लगाते थे, लेकिन इस बार 29 वर्षीय जर्मन खिलाड़ी ने अपने अनुभव, मानसिक मजबूती और शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए आखिरकार उस दीवार को तोड़ दिया जो लंबे समय से उनके और ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी के बीच खड़ी थी।

मैच की शुरुआत से ही ज्वेरेव आक्रामक नजर आए। पहले सेट में उन्होंने कोबोली को कोई मौका नहीं दिया और केवल 33 मिनट में 6-1 से सेट अपने नाम कर लिया। हालांकि दूसरे सेट में इटली के युवा खिलाड़ी ने जबरदस्त वापसी की और 6-4 से जीत दर्ज कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी रैलियां और संघर्ष देखने को मिला, लेकिन महत्वपूर्ण अंकों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए ज्वेरेव ने 6-4 से बढ़त हासिल कर ली।

चौथा सेट फाइनल का सबसे रोमांचक दौर साबित हुआ। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी सर्विस बचाए रखीं और मुकाबला टाई-ब्रेक तक पहुंच गया। टाई-ब्रेक में कोबोली ने शानदार संयम दिखाते हुए सेट जीत लिया और मैच को निर्णायक पांचवें सेट में पहुंचा दिया। उस समय ऐसा लग रहा था कि युवा इटालियन खिलाड़ी इतिहास रच सकता है, लेकिन अंतिम सेट में ज्वेरेव का अनुभव और फिटनेस निर्णायक साबित हुई।

पांचवें और अंतिम सेट में ज्वेरेव ने पूरी तरह नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने लगातार दबाव बनाते हुए कोबोली की सर्विस कई बार तोड़ी और 6-1 से सेट जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। जीत के साथ ही रोलां गैरोस का पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। मैच समाप्त होते ही ज्वेरेव भावुक हो गए और उन्होंने अपने परिवार, कोचिंग स्टाफ तथा प्रशंसकों का धन्यवाद किया, जिन्होंने कठिन दौर में उनका साथ नहीं छोड़ा।

ज्वेरेव की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने जर्मन टेनिस के 30 वर्षों के लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया है। 1980 और 1990 के दशक में जर्मनी के महान खिलाड़ी बोरिस बेकर विश्व टेनिस के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते थे। बेकर ने अपने करियर में छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और 1985 में केवल 17 वर्ष की आयु में विंबलडन जीतकर इतिहास रच दिया था। वह उस दौर में जर्मन खेल जगत की सबसे बड़ी पहचान बन गए थे और कई वर्षों तक विश्व टेनिस पर उनका दबदबा रहा। 1996 में ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतना उनके करियर का अंतिम ग्रैंड स्लैम खिताब साबित हुआ। इसके बाद जर्मनी को किसी पुरुष खिलाड़ी के ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनने के लिए पूरे तीन दशक तक इंतजार करना पड़ा।

बेकर के संन्यास के बाद कई जर्मन खिलाड़ी उभरे, लेकिन कोई भी ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी जीतने में सफल नहीं हो पाया। अलेक्जेंडर ज्वेरेव लंबे समय से इस उम्मीद का सबसे बड़ा चेहरा थे। कई बार फाइनल तक पहुंचने और हार झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अब फ्रेंच ओपन 2026 जीतकर उन्होंने न केवल अपना सपना पूरा किया है, बल्कि जर्मनी को भी वह गौरव लौटाया है जिसकी प्रतीक्षा टेनिस प्रेमी वर्षों से कर रहे थे।

दूसरी ओर फ्लावियो कोबोली भले ही खिताब जीतने से चूक गए, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन ने टेनिस जगत को प्रभावित किया है। युवा इटालियन खिलाड़ी ने कई शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया और ज्वेरेव को भी कड़ी चुनौती दी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कोबोली विश्व टेनिस के बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं।

फ्रेंच ओपन 2026 का यह फाइनल लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एक ओर अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की, वहीं दूसरी ओर टेनिस प्रेमियों को पांच सेटों तक चला एक यादगार मुकाबला देखने को मिला। इस जीत के साथ ज्वेरेव ने आलोचकों को करारा जवाब दिया है और साबित कर दिया है कि लगातार प्रयास, धैर्य, आत्मविश्वास और संघर्ष की बदौलत सबसे बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है। अब उनका नाम बोरिस बेकर जैसे महान खिलाड़ियों की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले नए जर्मन चैंपियन के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

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