Home » National » तीन-भाषा नीति पर बढ़ा विवाद, दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी से लगाई रोक की गुहार

तीन-भाषा नीति पर बढ़ा विवाद, दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी से लगाई रोक की गुहार

शिक्षा / राष्ट्रीय | पलक राज | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जून 2026

नई दिल्ली। सीबीएसई द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति को मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के निर्णय पर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस नीति के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी और आवश्यक संसाधनों के बीच सत्र में इस तरह का बड़ा बदलाव लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।

दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में कहा है कि उन्हें सीबीएसई कक्षा 9 के छात्रों के अभिभावकों के एक समूह की ओर से एक प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है, जिसमें तीन-भाषा नीति के अनिवार्य कार्यान्वयन का विरोध किया गया है। अभिभावकों का कहना है कि जब शैक्षणिक सत्र काफी आगे बढ़ चुका है, ऐसे समय में नई भाषा को अनिवार्य बनाना छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा होगा। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि इससे छात्रों की पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और मानसिक दबाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात को उठाया है कि देश के अनेक स्कूलों में अभी भी पर्याप्त संख्या में भाषा शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कई स्थानों पर नई भाषा के लिए पाठ्यपुस्तकों और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था भी पूरी तरह नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि किसी भी नई शिक्षा नीति को लागू करने से पहले शिक्षकों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, पाठ्य सामग्री की उपलब्धता और छात्रों को समायोजित होने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। यदि यह तैयारी पूरी किए बिना नीति लागू की जाती है तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों को ही उठाना पड़ेगा।

दिग्विजय सिंह ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि जल्दबाजी में लागू की गई व्यवस्थाएं अक्सर व्यावहारिक स्तर पर कठिनाइयां पैदा करती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तीन-भाषा नीति के मामले में भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो सकती है, यदि सरकार और शिक्षा बोर्ड पहले से पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित नहीं करते। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय पर राज्यों, शिक्षा विशेषज्ञों, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ व्यापक चर्चा कर एक व्यावहारिक और सर्वमान्य समाधान निकाला जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तीन-भाषा नीति को भारतीय शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाना और भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देना है। सरकार और नीति के समर्थकों का मानना है कि इससे छात्रों की भाषाई क्षमता बढ़ेगी और उन्हें विभिन्न भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों को समझने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इसके क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर विभिन्न राज्यों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्तियां भी सामने आती रही हैं।

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि नीति का उद्देश्य सकारात्मक हो सकता है, लेकिन किसी भी बड़े बदलाव की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि पर्याप्त शिक्षक, किताबें और प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं होंगे तो छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि लंबे समय तक इंतजार करने से शिक्षा सुधारों की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और इसलिए योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना भी आवश्यक है।

फिलहाल दिग्विजय सिंह की इस मांग ने शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार तीन-भाषा नीति को तय कार्यक्रम के अनुसार लागू करती है या फिर छात्रों, अभिभावकों और विपक्ष द्वारा उठाई गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इसके कार्यान्वयन पर पुनर्विचार करती है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted