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शिक्षा मंत्रालय में आग का पता नहीं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था को संकट में धकेल रही है बीजेपी: कांग्रेस

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 जून 2026

CBSE विवाद पर केंद्र सरकार घिरी, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस ने CBSE के OnMark पोर्टल, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और कथित टेंडर अनियमितताओं को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि शिक्षा मंत्रालय को शायद अपने दफ्तरों में लगी आग का पता हो या न हो, लेकिन देश की शिक्षा व्यवस्था में लगी असली आग बीजेपी की नीतियों और कुकर्मों का परिणाम है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का माध्यम नहीं बल्कि पेपर लीक माफियाओं और ठेकेदारी व्यवस्था के जरिए लूट का धंधा बना दिया है। पार्टी का आरोप है कि व्यापम घोटाले से शुरू हुई कहानी अब CBSE तक पहुंच चुकी है और इसकी कीमत देश के करोड़ों छात्र चुका रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि जब सुना कि PM मोदी खुद इस मामले की ‘निगरानी’ करेंगे तो सब डर गए कि भाई साहिब, बख्श दो, आप तो निगरानी मत ही रखो तो शायद कुछ भला हो जाए।”

कांग्रेस ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में NEET, CUET, JEE Mains, BPSC और अन्य कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं विवादों, पेपर लीक, तकनीकी खामियों और प्रशासनिक विफलताओं के कारण चर्चा में रही हैं। अब CBSE के मूल्यांकन तंत्र पर उठे सवालों ने यह साबित कर दिया है कि देश की परीक्षा प्रणाली का भरोसा लगातार कमजोर होता जा रहा है। पार्टी के अनुसार यह केवल किसी एक परीक्षा या संस्थान का मामला नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर संकट है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब युवा अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, तब सरकार उनकी मेहनत और सपनों की रक्षा करने में असफल साबित हो रही है।

AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लागू की गई डिजिटल प्रणाली में टेंडर प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण शर्तों को बदला गया। कांग्रेस का दावा है कि जिन मानकों के आधार पर अनुभवी और तकनीकी रूप से सक्षम कंपनियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, उन्हें कमजोर कर दिया गया। पार्टी के अनुसार DPI गुणवत्ता, हाई-स्पीड स्कैनिंग तकनीक, अनुभव, वित्तीय क्षमता और डेटा सुरक्षा से जुड़े कई मानकों में बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को लाभ मिला। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर किसके दबाव में नियम बदले गए और किसे फायदा पहुंचाने के लिए यह पूरी प्रक्रिया संचालित की गई।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि विशेषज्ञों और शिक्षकों द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की 36 संभावित खामियों की ओर पहले ही संकेत किया गया था, लेकिन सरकार और संबंधित एजेंसियों ने उन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया। पार्टी का कहना है कि यदि इन सुझावों पर समय रहते कार्रवाई की जाती तो आज छात्रों के डेटा, उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुए विवाद सामने नहीं आते। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर असर डालती है।

हाल में एक युवा एथिकल हैकर द्वारा CBSE के OnMark पोर्टल में कथित सुरक्षा कमजोरियों के खुलासे को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का दावा है कि इस घटना ने देश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के डेटा संरक्षण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कांग्रेस के अनुसार यदि students की उत्तर पुस्तिकाएं, मोबाइल नंबर, ई-मेल, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारियां जोखिम में पड़ी हैं तो यह केवल तकनीकी चूक नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का मामला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार जवाब देने के बजाय मामले को दबाने और ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब देश के लाखों छात्र परीक्षा घोटालों, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्था से परेशान हैं, तब सरकार युवाओं के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय प्रचार और राजनीतिक प्रबंधन में व्यस्त दिखाई देती है। कांग्रेस का दावा है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों और युवाओं के मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी चिंताओं का जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही निशाना बना रही है।

शिक्षा बजट को लेकर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। पार्टी का कहना है कि शिक्षा पर सरकारी खर्च लगातार घटता जा रहा है, जबकि नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार यदि शिक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश नहीं होगा तो स्कूलों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता प्रभावित होना तय है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार शिक्षा सुधार के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि CBSE के OnMark पोर्टल, OSM प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया और कथित डेटा सुरक्षा चूक की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि यदि छात्रों की निजी जानकारी और परीक्षा व्यवस्था के साथ किसी प्रकार का समझौता हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि देश के युवाओं का भविष्य किसी राजनीतिक या प्रशासनिक प्रयोगशाला का विषय नहीं हो सकता।

हालांकि CBSE ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि पोर्टल में चिन्हित सुरक्षा कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और अन्य संभावित खामियों की जांच जारी है। बोर्ड का कहना है कि छात्रों के हितों और डेटा सुरक्षा की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके बावजूद कांग्रेस और विपक्षी दलों के हमलों ने इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

देश की करोड़ों छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और CBSE इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं। क्योंकि सवाल केवल एक पोर्टल, एक टेंडर या एक तकनीकी चूक का नहीं है, बल्कि उस शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का है जिस पर भारत के भविष्य की नींव टिकी हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई तो शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास और कमजोर होगा तथा इसकी सबसे बड़ी कीमत देश के युवाओं को चुकानी पड़ेगी।

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