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डील नहीं तो फिर जंग! अमेरिका की ईरान को चेतावनी, ट्रंप के फैसले पर टिकी दुनिया

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 30 मई 2026

मध्य पूर्व में युद्ध और शांति के बीच चल रही रस्साकशी के बीच अमेरिका ने ईरान को एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ कहा है कि यदि वार्ता विफल होती है तो अमेरिका किसी भी समय ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने में पूरी तरह सक्षम है। उनके इस बयान ने संकेत दे दिया है कि युद्धविराम और संभावित समझौते के बावजूद तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है।

सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग सम्मेलन में बोलते हुए हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त हथियार भंडार मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ फिर से हमले शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी सैन्य क्षमता में कोई कमी नहीं आने दी है और दुनिया के किसी भी हिस्से में कार्रवाई करने की पूरी तैयारी रखता है।

उधर व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तभी किसी समझौते को अंतिम मंजूरी देंगे जब ईरान उनकी सभी शर्तें स्वीकार करेगा। इनमें परमाणु हथियार कार्यक्रम पर पूर्ण रोक, होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी बाधा के खोलना और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रमुख मांगें शामिल हैं।

हालांकि तेहरान ने अमेरिकी दावों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। विशेष रूप से संवर्धित यूरेनियम भंडार, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न अभी भी वार्ता की सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

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इस बीच इजरायल और लेबनान के बीच भी तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के सात गांवों के निवासियों को इलाके खाली करने की चेतावनी जारी की है। इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह युद्धविराम समझौते का उल्लंघन कर रहा है और इसी कारण सैन्य कार्रवाई जरूरी हो गई है। दूसरी ओर लेबनान से इजरायल की ओर दागे गए कई रॉकेटों को इजरायली सेना ने मार गिराने का दावा किया है।

दिलचस्प बात यह है कि दशकों बाद पहली बार इजरायल और लेबनान के सैन्य अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन में प्रत्यक्ष वार्ता भी हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने इन बैठकों को “सकारात्मक और उपयोगी” बताया है। माना जा रहा है कि यह बातचीत भविष्य में व्यापक राजनीतिक समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक ऐसे नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाए हैं जिस पर अमेरिकी तकनीकी कंपनियों को धोखा देकर ईरान के रक्षा क्षेत्र के लिए संवेदनशील उपकरण हासिल करने का आरोप है। अमेरिका का दावा है कि यह नेटवर्क दुबई के माध्यम से तकनीक की तस्करी कर रहा था।

उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सैन्य अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की, लेकिन अभी तक किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार वार्ता जारी है और ट्रंप सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं। यदि समझौता होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से सामान्य रूप से खुल सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि वार्ता विफल होती है तो मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की आग में झुलस सकता है।

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फिलहाल स्थिति यही बताती है कि युद्धविराम कायम है, लेकिन शांति अभी भी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं है। ट्रंप के अंतिम फैसले और ईरान की प्रतिक्रिया पर आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की दिशा निर्भर करेगी।

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