राजनीति | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 27 मई 2026
तमिलनाडु की राजनीति में पिछले दो हफ्तों से चल रहा बड़ा सियासी संकट फिलहाल थमता दिखाई दे रहा है। All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam यानी AIADMK के भीतर हुआ बड़ा विभाजन अब समझौते की ओर बढ़ गया है। पार्टी महासचिव Edappadi K. Palaniswami और पूर्व मंत्री S.P. Velumani के नेतृत्व वाले दोनों गुटों ने आपसी विवाद खत्म कर एकजुट होने का फैसला किया है। इस सुलह ने तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि हाल के घटनाक्रमों ने AIADMK के अस्तित्व और विपक्षी ताकत के रूप में उसकी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए थे।
करीब दो सप्ताह पहले AIADMK विधायक दल में उस समय बड़ा विभाजन सामने आया था जब कुछ विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay के नेतृत्व वाली सरकार के विश्वास मत के दौरान अलग रुख अपनाया था। इसके बाद पार्टी के भीतर खुला टकराव शुरू हो गया और दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग तक कर दी थी।
अब ताजा घटनाक्रम में एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व वाले बागी विधायकों ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष J.C.D. Prabhakar को पत्र सौंपकर अपने व्यवहार के लिए “क्षमा” और “माफी” की मांग की है। उन्होंने विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप के खिलाफ मतदान करने पर खेद जताया और भविष्य में पार्टी अनुशासन का पालन करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाएं वापस लेने का फैसला किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता केवल संगठनात्मक एकता बनाए रखने के लिए नहीं बल्कि बदलते तमिलनाडु राजनीतिक समीकरणों का परिणाम भी है। हाल के महीनों में Tamilaga Vettri Kazhagam यानी TVK और मुख्यमंत्री विजय की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने विपक्षी दलों पर दबाव बढ़ाया है। AIADMK को डर था कि अंदरूनी लड़ाई जारी रहने पर पार्टी का जनाधार और कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AIADMK के लिए यह एक “राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई” बन चुकी थी। पार्टी पहले ही कई वरिष्ठ नेताओं के असंतोष, विधायकों के इस्तीफों और TVK की बढ़ती लोकप्रियता से जूझ रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता था कि विभाजन और गहरा हो तथा इसका फायदा सत्तारूढ़ पक्ष या अन्य विपक्षी दलों को मिले।
इस सुलह के बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जारी है कि पार्टी के भीतर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई विधायक अब भी नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर असमंजस में बताए जा रहे हैं। हालांकि फिलहाल पलानीस्वामी और वेलुमणि गुटों के एक साथ आने से AIADMK को तत्काल राहत जरूर मिली है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब राज्य में सत्ता समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विपक्ष खुद को पुनर्गठित करने में जुटा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि AIADMK की यह एकता कितनी मजबूत साबित होती है और क्या पार्टी दोबारा राज्य की राजनीति में अपनी खोई ताकत हासिल कर पाती है या नहीं।




