Home » National » मलिहाबाद किला विवाद: राजा कंस पासी का किला, शिव मंदिर या वक्फ संपत्ति? लखनऊ में क्यों बढ़ा तनाव

मलिहाबाद किला विवाद: राजा कंस पासी का किला, शिव मंदिर या वक्फ संपत्ति? लखनऊ में क्यों बढ़ा तनाव

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 25 मई 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में इन दिनों एक प्राचीन ढांचे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पासी समाज इस जगह को राजा कंस पासी का ऐतिहासिक किला और प्राचीन शिव मंदिर बता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह वक्फ संपत्ति है और यहां वर्षों से नमाज अदा की जाती रही है। विवाद बढ़ने के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और मामला अब प्रशासनिक व कानूनी बहस का रूप लेता जा रहा है।

यह विवाद लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर शुरू हुआ। पासी समाज के लोगों का दावा है कि यह स्थान “राजा कंस पासी” के ऐतिहासिक किले का हिस्सा है, जिसे स्थानीय लोग “कंसमंडी किला” भी कहते हैं। समाज के लोगों का कहना है कि यहां पहले शिव मंदिर मौजूद था और बाद में इस जगह की पहचान बदल दी गई। अब वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे और कार्बन डेटिंग कराने की मांग कर रहे हैं ताकि वास्तविक इतिहास सामने आ सके।

दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह वक्फ संपत्ति है और यहां लंबे समय से नमाज होती रही है। उनका दावा है कि यह न तो कोई किला है और न ही मंदिर। स्थानीय मुस्लिम पक्ष ने साफ कहा है कि अगर दूसरा पक्ष अदालत जाएगा तो वे भी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। शुक्रवार की नमाज के दौरान किसी तरह का तनाव न बढ़े, इसके लिए प्रशासन ने इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब ढांचे के अंदर मौजूद कुछ आकृतियों, फूलों की नक्काशी और पुराने चिन्हों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे। पासी समाज और कुछ स्थानीय लोग इन्हें हिंदू प्रतीकों से जोड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज कर रहा है। प्रशासन फिलहाल शांति बनाए रखने की कोशिश में जुटा है और पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है।

राजा कंस पासी को लेकर भी इलाके में ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि अवध क्षेत्र, खासकर लखनऊ और मलिहाबाद के आसपास कभी उनका प्रभाव था। पासी समाज लंबे समय से इस इतिहास को पहचान दिलाने की मांग करता रहा है। अब इस विवाद ने उस मांग को फिर से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ जमीन या धार्मिक स्थल का विवाद नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और विरासत की लड़ाई भी बन चुका है। आने वाले दिनों में अगर ASI सर्वे या अदालत की निगरानी में जांच होती है, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती इलाके में शांति बनाए रखना और किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव को रोकना है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments