अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ओस्लो | 24 मई 2026
आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून म्योल फ्रॉस्टाडोटिर ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत और नॉर्डिक देशों के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर है, लेकिन शांति और वैश्विक स्थिरता को लेकर दोनों पक्षों की सोच समान है। ओस्लो में आयोजित इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में 38 वर्षीय आइसलैंडिक प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि “यूक्रेन को यह युद्ध जीतना होगा।” उन्होंने कहा कि यूरोप के लिए यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडोटिर ने माना कि भारत और नॉर्डिक देशों के रूस के साथ संबंधों और रणनीतिक दृष्टिकोण में अंतर है, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्ष वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय संवाद को मजबूत करने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है जहां मध्यम शक्तियों वाले देशों को मिलकर साझा मंच तैयार करने की जरूरत है, ताकि वैश्विक महाशक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच संतुलन कायम रखा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया-नॉर्डिक सहयोग आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में एक नए संतुलनकारी समूह के रूप में उभर सकता है।
आइसलैंड की प्रधानमंत्री ने भारत के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत और आइसलैंड के बीच व्यापार बहुत सीमित है, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय फिल्म उद्योग को आइसलैंड में शूटिंग के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि वहां के प्राकृतिक दृश्य और आधुनिक सुविधाएं भारतीय सिनेमा के लिए बेहद आकर्षक साबित हो सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बॉलीवुड और भारतीय मनोरंजन उद्योग दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को नई मजबूती देंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इंडिया-नॉर्डिक समिट केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तेजी से बदलती वैश्विक राजनीति में नए रणनीतिक समीकरणों का संकेत भी है। एक तरफ यूरोपीय देश रूस के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए हैं, वहीं भारत संतुलित कूटनीतिक नीति अपनाकर शांति और संवाद पर जोर दे रहा है। ऐसे में नॉर्डिक देशों और भारत के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर पैदा कर सकता है।




