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ईरान-अमेरिका तनाव फिर गहराया, तेहरान ने अमेरिका पर लगाए “अत्यधिक दबाव” के आरोप

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 24 मई 2026

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। तेहरान ने अमेरिका पर “अत्यधिक मांगें” थोपने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर अमेरिकी मीडिया में यह खबरें सामने आ रही हैं कि वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों पर विचार कर सकता है। इस बीच ईरानी नेतृत्व नवीनतम शांति प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा कर रहा है। हालात की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक अपने बेटे की शादी में शामिल होने का कार्यक्रम रद्द कर वॉशिंगटन में रुकने का फैसला किया है। व्हाइट हाउस की ओर से इसे “सरकारी परिस्थितियों” से जुड़ा निर्णय बताया गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में इसे ईरान संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि तेहरान की कोशिश पहले एक “समझौता ज्ञापन” यानी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट तैयार करने की थी, जिसमें 14 प्रमुख बिंदु शामिल थे। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की ओर से अत्यधिक दबाव और कठोर शर्तें रखी जा रही हैं, जिससे बातचीत का माहौल प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में ईरान की भूमिका जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी बहुत गहरा बना हुआ है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का तेहरान दौरा भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय तनाव कम कराने और मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने आसिम मुनीर से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। पश्चिम एशिया में पहले से जारी अस्थिरता, इजरायल-ईरान तनाव और अमेरिका की संभावित सैन्य रणनीति ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होती है या सैन्य कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। तेल बाजार, वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर तेहरान और वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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