अंतरराष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 मई 2026
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का सबसे अहम और भरोसेमंद साझेदार बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस वर्ष वॉशिंगटन आने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। चार दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे रुबियो ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं के बीच वैश्विक सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यापक चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया की अस्थिरता जैसे कई बड़े संकटों से जूझ रही है और अमेरिका एशिया में अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की नीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बैठक के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि भारत आज केवल दक्षिण एशिया की शक्ति नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और संतुलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और आर्थिक ढांचे को नई दिशा दे सकती है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी जून में फ्रांस के एवियन शहर में होने वाले जी-7 आउटरीच सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा वर्ष के अंत में अमेरिका में प्रस्तावित जी-20 सम्मेलन में भी दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है।
मार्को रुबियो का यह दौरा केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे क्वाड समूह को नई ऊर्जा देने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। रुबियो रविवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और 26 मई को आयोजित होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक में जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि क्वाड देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन और चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों जैसे मुद्दों पर अहम रणनीतिक चर्चा हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब भारत को केवल एक क्षेत्रीय सहयोगी के रूप में नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले एक दीर्घकालिक और निर्णायक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। यही वजह है कि रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीक के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच विकसित होती व्यक्तिगत समझ और राजनीतिक तालमेल भी इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका संबंध वैश्विक कूटनीति के सबसे प्रभावशाली समीकरणों में शामिल हो सकते हैं, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।




