राष्ट्रीय / स्वास्थ्य | मोबनी मजूमदार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026
केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना यानी CGHS (Central Government Health Scheme) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत अब सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी जिस विकल्प को एक बार चुन लेंगे — यानी माता-पिता या सास-ससुर — वही विकल्प जीवनभर लागू रहेगा और बाद में उसे बदला नहीं जा सकेगा। इस फैसले के बाद लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने CGHS लाभार्थियों के लिए आश्रित परिवार सदस्यों को शामिल करने से जुड़े नियमों को और स्पष्ट किया है। अब यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता को आश्रित के रूप में CGHS सुविधा में शामिल करता है, तो भविष्य में वह सास-ससुर को इस योजना में नहीं जोड़ सकेगा। इसी तरह अगर शुरुआत में सास-ससुर को चुना गया, तो बाद में माता-पिता को शामिल करने का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य योजना में पारदर्शिता लाना और बार-बार विकल्प बदलने से उत्पन्न प्रशासनिक जटिलताओं को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में कर्मचारी परिस्थितियों के अनुसार बार-बार विकल्प बदलने की कोशिश करते थे, जिससे रिकॉर्ड प्रबंधन और पात्रता निर्धारण में दिक्कतें आती थीं।
CGHS केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, जिसके तहत केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रित परिवार सदस्यों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस योजना के अंतर्गत सरकारी और पैनल अस्पतालों में इलाज, दवाइयां और कई स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं। ऐसे में नए नियम का सीधा असर बड़ी संख्या में लाभार्थियों पर पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशनों ने इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ संगठनों का कहना है कि स्पष्ट नियम होने से भ्रम की स्थिति खत्म होगी, जबकि कई लोगों का मानना है कि पारिवारिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं, इसलिए विकल्प बदलने की सीमित अनुमति दी जानी चाहिए थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त परिवार, वृद्ध माता-पिता की देखभाल और बदलती पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए यह नियम भविष्य में विवाद का विषय भी बन सकता है। खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है जिनकी पारिवारिक परिस्थितियां समय के साथ बदल जाती हैं।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से जारी इस नए प्रावधान को लेकर विभिन्न विभागों में दिशा-निर्देश साझा किए जा रहे हैं। CGHS लाभार्थियों को सलाह दी जा रही है कि वे आश्रितों का विकल्प चुनते समय पूरी सावधानी बरतें, क्योंकि एक बार लिया गया फैसला आगे स्थायी माना जाएगा।




