नई दिल्ली
18 जुलाई 2025
भारत को 2036 ओलंपिक में शीर्ष 10 देशों की सूची में लाने के लिए केंद्र सरकार ने आज अपनी महत्वाकांक्षी रणनीति का खुलासा किया। खेल और युवा मामलों के केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने ‘खेलो भारत कॉन्क्लेव’ में देश के खेल जगत को संबोधित करते हुए कहा, “देश को पहले रखें, अहंकार को छोड़ें — केवल एकजुट प्रयास ही भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बना सकता है।”
इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव में भारतीय ओलंपिक संघ, पैरा ओलंपिक कमेटी ऑफ इंडिया, नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन्स, कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधि, और देश के प्रमुख खेल प्रशासक एक मंच पर जुटे। उद्देश्य स्पष्ट था — भारत को 2047 तक वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने का ठोस रोडमैप तैयार करना।
डॉ. मंडाविया ने कहा कि अब समय आ गया है जब खेल नीति, कोचिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट स्काउटिंग और वित्तीय निवेश जैसे पहलुओं को मिशन मोड में लाया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार, खेल संगठन और निजी क्षेत्र को एक साझा लक्ष्य के तहत मिलकर काम करना होगा, तभी भारत ओलंपिक और पैरा ओलंपिक में गौरवपूर्ण पदक स्थिति हासिल कर सकेगा।
कॉन्क्लेव में यह भी तय किया गया कि खेलों को स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक अनिवार्य और व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाएगा, और स्पोर्ट्स साइंस, न्यूट्रिशन, मनोविज्ञान व आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों को राष्ट्रीय खेल नीति का हिस्सा बनाया जाएगा।
यह सम्मेलन ‘नए भारत’ के खेल संकल्प का प्रतीक बना, जो देश को 2036 में ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष पंक्ति पर और 2047 तक वैश्विक स्पोर्टिंग सुपरपावर बनाने की ओर ले जाएगा।




