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ईरान ने तबाह कराज ब्रिज को बनाया ‘प्रतिरोध का प्रतीक’, अमेरिका-इजराइल पर लगाए बड़े आरोप

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कराज (ईरान) | 8 मई 2026

ईरान के कराज शहर में मौजूद बी1 ब्रिज अब सिर्फ एक टूटा हुआ पुल नहीं रहा, बल्कि उसे “प्रतिरोध और जज्बे” के प्रतीक के तौर पर पेश किया जा रहा है। अमेरिकी और इजराइली हमलों में तबाह हुए इस विशाल पुल को लेकर ईरान ने दावा किया है कि यह हमला केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं, बल्कि देश की औद्योगिक और सामाजिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश थी।

कराज नदी के ऊपर बना यह बी1 ब्रिज कभी खाड़ी क्षेत्र का सबसे ऊंचा पुल माना जाता था। लेकिन 2 अप्रैल 2026 की रात हुए हमलों के बाद अब वहां सिर्फ मुड़ी हुई लोहे की बीमें, टूटे कंक्रीट के टुकड़े और मलबा बचा है।

ईरानी अधिकारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हमला बेहद सुनियोजित था। उनका आरोप है कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर इस रणनीतिक पुल को निशाना बनाया ताकि तेहरान और उत्तर-पश्चिमी इलाकों के बीच संपर्क कमजोर किया जा सके।

यह पुल तेहरान को उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ता था, जहां बड़ी संख्या में अज़ेरी समुदाय के लोग रहते हैं। कराज शहर में भी अज़ेरी आबादी काफी प्रभावशाली मानी जाती है। यही वजह है कि ईरान इस हमले को सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहा है।

हमले के बाद ईरानी मीडिया लगातार इस पुल की तस्वीरें और वीडियो दिखा रहा है। सरकारी मीडिया में इसे “इरादों को नहीं तोड़ सकने वाली ताकत” बताया जा रहा है। स्थानीय लोग भी मलबे के बीच पहुंचकर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसे “ईरानी हौसले” का प्रतीक बता रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस घटना को राष्ट्रीय एकता और विरोध की भावना मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। जिस पुल को कभी आधुनिक इंजीनियरिंग की पहचान माना जाता था, अब वही युद्ध और संघर्ष की नई कहानी बन गया है।

हालांकि अमेरिका और इजराइल की ओर से इस हमले को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस तरह की घटनाएं लगातार वैश्विक चिंता बढ़ा रही हैं। कराज का यह टूटा पुल अब सिर्फ मलबा नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और भावनात्मक लड़ाई का नया प्रतीक बन चुका है।

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