राष्ट्रीय / व्यापार | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 मई 2026
बदलते वैश्विक हालात और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपने सोने के भंडार को विदेशों से वापस देश में लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। Reserve Bank of India की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अब देश के कुल स्वर्ण भंडार का करीब 77 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही सुरक्षित रखा जा चुका है, जबकि पहले इसका बड़ा हिस्सा लंदन और न्यूयॉर्क जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में रखा जाता था। यह बदलाव सिर्फ आर्थिक रणनीति नहीं, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भरोसे और नियंत्रण से जुड़ा एक अहम संकेत माना जा रहा है। लंबे समय से कई देश अपनी गोल्ड रिजर्व को विदेशी तिजोरियों में इसलिए रखते थे ताकि अंतरराष्ट्रीय लेन-देन, सुरक्षा और तरलता (liquidity) बनी रहे। लेकिन हाल के वर्षों में दुनिया भर में बढ़ते राजनीतिक टकराव, प्रतिबंधों का खतरा और आर्थिक अस्थिरता ने इस सोच को बदल दिया है। भारत समेत कई देश अब अपने भंडार को घरेलू नियंत्रण में रखना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन पर सीधा नियंत्रण बना रहे और बाहरी दबावों का असर कम हो।
यह कदम केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक ट्रेंड बन चुका है, जिसे “गोल्ड रिपैट्रिएशन” कहा जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों की बढ़ती घटनाओं ने देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि संकट के समय विदेशी तिजोरियों में रखा सोना तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में अपने देश में भंडारण से आर्थिक संप्रभुता और आपातकालीन तैयारी दोनों मजबूत होती हैं।
भारत के इस कदम को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे न सिर्फ देश की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यह संकेत भी जाता है कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपने संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेंड और तेज हो सकता है, क्योंकि दुनिया भर में देश अपनी आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसी राह पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।




