राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़/नई दिल्ली | 25 अप्रैल 2026
पंजाब की राजनीति में अचानक हलचल तेज़ हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद अब यह मामला सीधे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मिलने के लिए समय मांगा है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में वह उन सातों सांसदों को रिकॉल करने यानी वापस बुलाने की मांग रखेंगे, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि जनता ने जिन प्रतिनिधियों को एक पार्टी के नाम पर चुनकर भेजा, उनका अचानक दूसरी पार्टी में जाना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। इसलिए इस मामले में संवैधानिक स्तर पर हस्तक्षेप जरूरी है। इसी वजह से वह अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मिलकर पूरा पक्ष रखने की तैयारी में हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा Raghav Chadha समेत उन सात सांसदों को लेकर हो रही है, जो हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि जनादेश के साथ धोखा है। पार्टी का कहना है कि दलबदल कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए और उन्हें फिर से जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब में बीजेपी की विधानसभा में स्थिति बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन राज्यसभा में उसकी संख्या अचानक बढ़ गई है। इसी को लेकर आप और बीजेपी के बीच सियासी टकराव और तेज़ हो गया है। आप इसे “पीछे के दरवाजे से ताकत बढ़ाने की कोशिश” बता रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि यह नेताओं का व्यक्तिगत फैसला है और लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राजनीतिक दिशा चुनने का अधिकार है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस पहल को आने वाले समय में बड़े राजनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अगर राष्ट्रपति से मुलाकात होती है और इस मुद्दे पर कोई संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है। साथ ही, दलबदल कानून को लेकर भी नई बहस छिड़ सकती है कि आखिर सांसदों और विधायकों के पार्टी बदलने पर क्या सख्त नियम होने चाहिए। पंजाब से उठी यह राजनीतिक लहर अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है और सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद क्या फैसला या संकेत सामने आता है। आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।




