अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 20 अप्रैल 2026
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता एक बार फिर अनिश्चितता में घिरती दिख रही है। इस बार विवाद के केंद्र में है होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी, जिसे पाकिस्तान ने बातचीत की सबसे बड़ी बाधा बताया है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर साफ कहा कि अगर ईरान के साथ वार्ता को आगे बढ़ाना है, तो सबसे पहले होर्मुज में लगी अमेरिकी नाकाबंदी पर पुनर्विचार करना होगा।
मुनीर ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, मुनीर ने ट्रंप को बताया कि ईरान इस नाकाबंदी को दबाव की नीति मान रहा है और इसी कारण वह वार्ता से पीछे हट रहा है। पाकिस्तान खुद इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है और इस्लामाबाद में संभावित बातचीत की तैयारी भी चल रही है।
ट्रंप का जवाब
मुनीर की बात पर ट्रंप ने सख्त प्रतिक्रिया देने के बजाय नरमी दिखाई। उन्होंने कहा कि वह इस सुझाव पर “विचार करेंगे।” हालांकि अभी तक अमेरिका की ओर से नाकाबंदी हटाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या नाकाबंदी का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
हाल ही में अमेरिकी सेना ने एक ईरानी जहाज को रोककर कब्जे में ले लिया, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इस घटना के बाद ईरान ने प्रस्तावित वार्ता से दूरी बना ली।
ईरान का सख्त रुख
ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि जब तक उस पर सैन्य दबाव और आर्थिक नाकाबंदी जारी रहेगी, वह किसी नई वार्ता में शामिल नहीं होगा। तेहरान का कहना है कि अमेरिका ने युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है और नाकाबंदी हटे बिना भरोसे की बहाली संभव नहीं है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया भर की बड़ी ताकतों की चिंता बढ़ा दी है। चीन सहित कई देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और कूटनीतिक समाधान निकालने पर जोर दिया है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका नाकाबंदी में नरमी दिखाता है, तो शांति वार्ता की राह खुल सकती है। लेकिन यदि मौजूदा स्थिति जारी रहती है, तो न सिर्फ बातचीत ठप हो सकती है बल्कि क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ सकता है। सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ट्रंप वास्तव में मुनीर की सलाह मानेंगे या होर्मुज की नाकाबंदी ही कूटनीति पर भारी पड़ती रहेगी।




