राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अप्रैल 2026
संसद के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने लोकसभा में जोरदार भाषण देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की कल्पना और दिशा तय करने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका रही है और हर आदमी ने अपनी जिंदगी में मां, बहन और परिवार की महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है।
राहुल गांधी ने भावनात्मक अंदाज में अपने बचपन का एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी दादी ने उन्हें डर का सामना करना सिखाया और कहा कि असली डर इंसान के मन और सोच में होता है। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक संदेश बताया।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार OBC और दलित समुदाय को हिंदू कहकर संबोधित तो करती है, लेकिन उन्हें देश के पावर स्ट्रक्चर में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं देती। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व के बिना समानता की बात अधूरी है।
परिसीमन के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों के लोगों में चिंता है कि उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विपक्ष इन राज्यों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi और Atal Bihari Vajpayee का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने ऐसे संवेदनशील मुद्दों को समझदारी से संभाला था, लेकिन मौजूदा सरकार उसी संतुलन को नहीं अपना रही है।
महिला आरक्षण कानून, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, पर चर्चा के बीच संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी टाइमिंग, लागू करने की शर्तों और परिसीमन से जोड़ने पर लगातार सवाल उठा रहा है।
संसद के इस सत्र में महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे को लेकर जारी बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।




