राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026
महिला आरक्षण बिल पर संसद में जारी बहस के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने बड़ा बयान देते हुए केंद्र सरकार से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर और इंतजार करना महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय होगा।
संसद में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा, “मेरी सलाह है कि लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को तुरंत दे दिया जाए। इसके लिए किसी परिसीमन या लंबी प्रक्रिया का इंतजार जरूरी नहीं है।” उनका यह बयान सीधे तौर पर सरकार की उस नीति पर सवाल उठाता है, जिसमें महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर लागू करने की बात कही गई है।
राहुल गांधी ने तर्क दिया कि वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में से लगभग 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं, जो 33 प्रतिशत के करीब बैठता है। उन्होंने कहा कि यह एक प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय है, जिसे तुरंत लागू किया जा सकता है, यदि सरकार की मंशा स्पष्ट हो।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस प्रक्रिया को लंबा खींच रही है। राहुल गांधी के अनुसार, महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना दरअसल इसे 2029 या उसके बाद तक टालने की रणनीति हो सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के नाम पर देरी करना “न्याय में देरी” के बराबर है।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने ओबीसी महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए, ताकि सामाजिक न्याय का संतुलन बना रहे। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह आरक्षण अधूरा रहेगा और समाज के एक बड़े वर्ग को उसका उचित हिस्सा नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया को आवश्यक बताया है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव सामने आया है, जिसके बाद आरक्षण लागू किया जाएगा।
वहीं विपक्ष का कहना है कि संविधान में संशोधन के बाद अब इस कानून को लागू करने के लिए किसी अतिरिक्त शर्त की जरूरत नहीं है। उनका तर्क है कि मौजूदा सीटों के भीतर ही आरक्षण लागू कर महिलाओं को तुरंत राजनीतिक भागीदारी दी जा सकती है।
महिला आरक्षण को लेकर संसद में यह बहस अब सिर्फ विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामाजिक न्याय की कसौटी बनती जा रही है। राहुल गांधी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे को आने वाले समय में और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है।




