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बिहार में बीजेपी का ‘सम्राट राज’, जदयू के विजय-बिजेंद्र बने डिप्टी CM

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 15 अप्रैल 2026

बिहार की राजनीति ने बुधवार को ऐसा करवट लिया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पहली बार अपने नेता सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसके साथ ही करीब दो दशकों तक केंद्र में रहे नीतीश कुमार के दौर पर प्रभावी विराम लग गया।

पटना के राजभवन में हुए सादगीपूर्ण लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम समारोह में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ गठबंधन संतुलन को साधते हुए जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। यह पहली बार है जब जदयू से दो नेताओं को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी गई है—जो साफ तौर पर सत्ता के भीतर नई साझेदारी का संकेत देता है।

राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को “पावर शिफ्ट” के रूप में देखा जा रहा है। अब तक बीजेपी बिहार में सहयोगी की भूमिका में थी, लेकिन इस बार उसने सीधे कमान संभालकर स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अब बैकसीट पर नहीं बैठने वाली।

बताया जा रहा है कि बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम पर तेजी से सहमति बनी। संगठन और आरएसएस पृष्ठभूमि से जुड़े चौधरी को “ग्राउंड कनेक्ट” वाला चेहरा माना जाता है, जो पिछड़े वर्ग की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं। यही वजह रही कि पार्टी ने उन्हें आगे कर बड़ा सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है।

दूसरी ओर, जदयू को दो डिप्टी सीएम देकर एनडीए ने यह संदेश भी दिया कि गठबंधन कायम रहेगा, लेकिन नेतृत्व की धुरी अब बदल चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मॉडल महाराष्ट्र की तर्ज पर तैयार किया गया है, जहां बीजेपी ने रणनीतिक तरीके से नेतृत्व अपने हाथ में लिया था।

मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि उनकी सरकार “विकास, कानून व्यवस्था और रोजगार” पर फोकस करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केंद्र और राज्य के बीच तालमेल से बिहार को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

हालांकि, विपक्ष ने इस बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं ने इसे “जनादेश के साथ खिलवाड़” करार दिया, तो वहीं बीजेपी इसे “राजनीतिक स्थिरता और विकास की नई शुरुआत” बता रही है।

स्पष्ट है कि बिहार अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है—जहां चेहरा बदला है, रणनीति बदली है और सत्ता का संतुलन भी पूरी तरह से नया रूप ले चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि “सम्राट राज” जमीन पर कितना असर दिखा पाता है।

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