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14 मिलियन ईरानी जान देने को तैयार– राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का बयान, युद्ध के साये में जबरदस्त लामबंदी

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 7 अप्रैल 2026

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Masoud Pezeshkian का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर गया है। ईरान के राष्ट्रपति ने दावा किया है कि अब तक 1 करोड़ 40 लाख से अधिक ईरानी नागरिक देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने की इच्छा जता चुके हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और अमेरिका तथा इज़राइल के साथ टकराव की आशंका लगातार गहराती जा रही है। पेज़ेशकियन ने अपने संबोधन में कहा कि यह सिर्फ एक संख्या नहीं बल्कि ईरान की “रूह और प्रतिबद्धता” का प्रतीक है, जो किसी भी चुनौती के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

राष्ट्रपति ने अपने बयान में खुद को भी इस सूची में शामिल बताते हुए कहा कि वह भी देश के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। उनके इस बयान को केवल भावनात्मक अपील नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। ईरान के भीतर हाल के दिनों में जिस तरह से आम लोगों, युवाओं और स्वयंसेवकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर संगठित किया जा रहा है, वह इस बात का संकेत है कि सरकार संभावित बड़े टकराव के लिए समाज के हर वर्ग को तैयार कर रही है। यह स्थिति केवल सैन्य तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी एक व्यापक लामबंदी का रूप ले चुकी है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में अमेरिका के साथ बढ़ती तनातनी अहम भूमिका निभा रही है। खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ा तनाव वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, और यहां किसी भी तरह का टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की ओर से ईरान को सख्त चेतावनी दी गई है, जिसके जवाब में ईरान ने न केवल अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी रणनीतिक ढांचों की सुरक्षा में शामिल करने की अपील की है।

विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का यह बयान दो स्तरों पर काम कर रहा है—एक ओर यह देश के भीतर राष्ट्रवाद और मनोबल को मजबूत करने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्पष्ट संदेश देता है कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। हालांकि, इसके साथ ही यह खतरा भी बढ़ गया है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे, तो यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया को उसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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