राष्ट्रीय / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अप्रैल 2026
महिला आरक्षण कानून को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर “यू-टर्न” ले रही है और महिलाओं को दिए गए वादों से पीछे हट रही है। कांग्रेस का कहना है कि जिस महिला आरक्षण विधेयक को बड़े जोर-शोर से पेश किया गया था, अब उसे लागू करने के मामले में सरकार स्पष्टता से बच रही है।
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने कहा कि सरकार ने संसद में महिला आरक्षण को ऐतिहासिक कदम बताकर राजनीतिक लाभ उठाया, लेकिन अब इसे लागू करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को टालने का काम किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना और परिसीमन (delimitation) का हवाला देकर सरकार महिलाओं को उनका अधिकार देने में देरी कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश की महिलाएं लंबे समय से संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार की नीतियों में स्पष्टता की कमी नजर आती है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकार की नीयत साफ है, तो महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने में क्या बाधा है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी का कहना है कि महिला आरक्षण कानून एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू होगा और इसमें जनगणना तथा परिसीमन जैसे जरूरी कदम शामिल हैं। पार्टी ने कांग्रेस पर राजनीतिक भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि यह मुद्दा महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा है, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का।
महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति का अहम विषय रहा है। संसद में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात वर्षों से चर्चा में रही है, लेकिन इसके लागू होने की समयसीमा और प्रक्रिया को लेकर अब भी सियासत जारी है।
इस बीच, विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा, खासकर जब देश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बन रहा है।




