राष्ट्रीय / न्यायपालिका | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली / तमिलनाडु | 6 अप्रैल 2026
तमिलनाडु के बहुचर्चित सत्तानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाते हुए नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा सुनाई है। यह मामला 2020 में सामने आया था, जब पिता-पुत्र — P. Jayaraj और J. Benicks — की पुलिस हिरासत में कथित रूप से बर्बर पिटाई के बाद मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून की रक्षा करने वालों द्वारा कानून को रौंदने का मामला है। अदालत ने टिप्पणी की कि दोषी पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अमानवीय अत्याचार किया, जिससे दो निर्दोष लोगों की जान चली गई। इस तरह के अपराध को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखते हुए मृत्युदंड को उचित ठहराया गया।
यह मामला Sathankulam में लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से दुकान बंद करने के समय को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा था। पुलिस ने पिता-पुत्र को हिरासत में लिया और आरोप है कि थाने में उनके साथ बर्बर मारपीट की गई। बाद में दोनों की हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई थी। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक न्याय की मांग उठी। मद्रास हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की निगरानी की और बाद में जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी गई।
CBI की जांच में पुलिसकर्मियों के खिलाफ ठोस सबूत सामने आए, जिनमें मेडिकल रिपोर्ट, चश्मदीद गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल थे। इन्हीं के आधार पर अदालत ने दोषियों को कठोरतम सज़ा देने का फैसला सुनाया।
इस फैसले को न्यायपालिका की सख्ती और कानून के शासन की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया है कि वर्दी के पीछे छिपकर अत्याचार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
मानवाधिकार संगठनों और आम नागरिकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। वहीं यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह के सख्त फैसले भविष्य में पुलिस हिरासत में होने वाले अत्याचारों पर रोक लगाने में मदद करेंगे।




