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COVID जैसी नीति शून्यता, महंगाई और LPG संकट से लोगों के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं : राहुल गांधी

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राष्ट्रीय / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अप्रैल 2026

देश में रसोई गैस (LPG) की बढ़ती कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ रहे भारी असर को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गरीब और मजदूर वर्ग के पास अब “चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह सिर्फ महंगाई का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीतिगत विफलता का परिणाम है, जिसने आम आदमी को उसकी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया है और देश के कमजोर तबकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में मौजूदा हालात की तुलना COVID-19 के दौर से करते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय जिस तरह अचानक फैसले लिए गए और करोड़ों मजदूरों को बिना किसी तैयारी के सड़कों पर छोड़ दिया गया, वैसी ही नीति शून्यता और असमंजस आज फिर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, सरकार के पास न तो कोई स्पष्ट आर्थिक रोडमैप है और न ही आम जनता, खासकर गरीब और मजदूर वर्ग को राहत देने की कोई ठोस योजना, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने मजदूर वर्ग और निम्न आय वर्ग की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि आज का मजदूर दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ रोजगार की अस्थिरता और दूसरी तरफ महंगाई की लगातार बढ़ती मार। ऐसे में रसोई गैस जैसे जरूरी संसाधन भी उनकी पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवार अब मजबूरी में गैस सिलेंडर भरवाने के बजाय पारंपरिक ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले का सहारा लेने को मजबूर हैं, जो न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है बल्कि यह देश के विकास और उज्ज्वल भविष्य के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

राहुल गांधी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर सरकार ने समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो देश एक बार फिर बड़े सामाजिक और आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और जीवन-यापन की कठिनाइयों के कारण मजदूरों का बड़े पैमाने पर पलायन एक बार फिर देखने को मिल सकता है, जैसा कि देश ने लॉकडाउन के दौरान देखा था। यह स्थिति न केवल मानवीय संकट को जन्म देगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर भी गहरा असर डालेगी।

सरकार की नीतियों को लेकर उन्होंने कहा कि आम आदमी की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और फैसले ऐसे लिए जा रहे हैं जिनका जमीनी सच्चाई से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महंगाई लगातार बढ़ रही है और लोगों की आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही है, तब सरकार राहत देने के लिए कौन से ठोस और प्रभावी कदम उठा रही है। उनके अनुसार, यह समय राजनीतिक प्रचार या बयानबाजी का नहीं, बल्कि संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियां बनाने का है, ताकि देश के हर वर्ग को राहत मिल सके और आम आदमी की जिंदगी आसान हो सके।

इस पूरे मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक घमासान और तेज होने की पूरी संभावना है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, जबकि आम जनता के बीच भी महंगाई और गैस कीमतों को लेकर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। यह मुद्दा अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर हर घर की रसोई, हर परिवार के मासिक बजट और देश के सामाजिक संतुलन से जुड़ा हुआ एक गंभीर विषय बन चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में और तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

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