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I Love My Daughter.. बेटी की मुस्कान सबसे बड़ी जीत—मेरठ में 8 साल बाद तलाक, पिता ने ढोल-नगाड़ों के साथ बेटी का किया स्वागत

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मेरठ | 5 अप्रैल 2026

मेरठ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो समाज को एक नया संदेश देती है। यहां 8 साल बाद तलाक लेकर घर लौटी बेटी का उसके परिवार ने ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। यह सिर्फ एक घर वापसी नहीं थी, बल्कि एक पिता का अपनी बेटी के साथ खड़ा होने का मजबूत और भावुक उदाहरण भी था। प्रणिता शर्मा की शादी करीब 8 साल पहले आर्मी के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। शुरुआती कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे ससुराल में परेशानियां बढ़ने लगीं। प्रणिता ने हालात को संभालने की कोशिश की और सोचा कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब स्थिति ज्यादा बिगड़ गई, तो उन्होंने आखिरकार तलाक लेने का फैसला किया।

यह फैसला आसान नहीं था। लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली और मानसिक रूप से भी यह सफर चुनौतीपूर्ण रहा। लेकिन आखिरकार 8 साल बाद प्रणिता को न्याय मिला और उनका तलाक हो गया। इसके बाद जब वह अपने घर लौटीं, तो उनके पिता और परिवार ने जिस तरह उनका स्वागत किया, उसने इस घटना को खास बना दिया।

प्रणिता के पिता ने ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी बेटी को घर लाया। परिवार के सभी लोगों ने एक जैसी टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर लिखा था—“I Love My Daughter”। यह दृश्य सिर्फ खुशी का नहीं, बल्कि एक संदेश का भी था कि बेटी बोझ नहीं होती, बल्कि गर्व और सम्मान की प्रतीक होती है।

पिता ने साफ कहा कि अगर कोई रिश्ता खुशी नहीं देता, तो उससे बाहर आना ही सही है। उन्होंने कहा कि एक पिता का सबसे बड़ा कर्तव्य अपनी बेटी की मुस्कान को सुरक्षित रखना है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने किसी तरह का पैसा या सामान लेने की मांग नहीं की, बल्कि सिर्फ अपनी बेटी की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी।

उन्होंने कहा, “हमें कोई पैसा नहीं चाहिए था, बस हमारी बेटी सुरक्षित और खुश रहे—यही हमारे लिए सबसे बड़ी बात है।” उनके इस बयान ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है, जहां अक्सर तलाक को लेकर नकारात्मक सोच देखी जाती है।

यह घटना उन परिवारों के लिए भी एक उदाहरण बनकर सामने आई है, जो सामाजिक दबाव के कारण गलत रिश्तों को ढोते रहते हैं। प्रणिता की कहानी यह बताती है कि अगर हालात सही नहीं हैं, तो हिम्मत के साथ निर्णय लेना जरूरी है और परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। मेरठ की यह घटना अब सिर्फ एक खबर नहीं रही, बल्कि एक सामाजिक संदेश बन गई है—कि बेटी की खुशी, सम्मान और सुरक्षा किसी भी रिश्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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