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WATCH VIDEO — असम फूलों का गुलदस्ता है, इसे दिल्ली के इशारों पर नहीं चलने देंगे : राहुल गांधी

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | असम | 2 अप्रैल 2026

जनता के हाथ में ताकत बनाम दिल्ली से नियंत्रण की सोच

असम की धरती से नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी पर जोरदार हमला बोलते हुए राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। उन्होंने असम को “फूलों का गुलदस्ता” बताते हुए कहा कि यहां अलग-अलग धर्म, जाति और विचारधारा के लोग साथ रहते हैं और यही इसकी असली ताकत है, लेकिन बीजेपी की राजनीति इस विविधता को कमजोर कर केंद्रीकरण थोपने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस की सोच है कि देश की असली ताकत जनता के हाथ में होनी चाहिए, जबकि बीजेपी चाहती है कि असम जैसे राज्यों को दिल्ली से कंट्रोल किया जाए। राहुल गांधी ने बीजेपी की नीतियों को सीधे-सीधे चुनौती देते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि सोच और व्यवस्था की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का मॉडल राज्यों की आवाज को दबाकर फैसलों को केंद्र में सीमित कर देता है, जिससे स्थानीय जनता की भागीदारी खत्म होती है। इसके उलट कांग्रेस का मॉडल हर वर्ग को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने का है, जहां जनता खुद अपने भविष्य का रास्ता तय करती है। राहुल गांधी ने कहा कि असम को चलाने का अधिकार असम की जनता के पास होना चाहिए, न कि दिल्ली में बैठी सत्ता के हाथों में।

इस दौरान उन्होंने संविधान के Article 244A of the Indian Constitution का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने इसे इसलिए लाया था ताकि असम के लोगों को असली ताकत मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट नीति है—असम को न केवल गुवाहाटी से और न ही दिल्ली से चलाया जाए, बल्कि जनता को सीधा अधिकार मिले कि वे अपने क्षेत्र, अपने संसाधनों और अपने भविष्य को लेकर फैसले खुद लें। राहुल गांधी के इस बयान ने एक बार फिर क्षेत्रीय स्वायत्तता बनाम केंद्रीकरण की बहस को सुलगा दिया है।

राहुल गांधी के इन तीखे बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस जहां इसे “जनता को अधिकार दिलाने की लड़ाई” बता रही है, वहीं बीजेपी के लिए यह बयान सीधी चुनौती बनकर उभरा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि असम की राजनीति अब केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह अधिकार, पहचान और सत्ता के संतुलन की लड़ाई में बदलती जा रही है।

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