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डीजल में 25 रुपये और पेट्रोल में 7.41 रुपये की भारी बढ़ोतरी, शेल इंडिया के फैसले से उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ, बेंगलुरु में प्रीमियम तेल 129 रुपये प्रति लीटर पहुंचा

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व्यापार/राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ब्यूरो रिपोर्ट | 1 अप्रैल 2026

देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं को एक और बड़ा झटका लगा है। निजी ईंधन कंपनी Shell India ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी की ओर से डीजल के दाम में 25 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है, जबकि पेट्रोल की कीमत 7.41 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है। इस फैसले का असर केवल निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, कृषि, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की खपत से जुड़े कई क्षेत्रों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बेंगलुरु में शेल के प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 129 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की खबर ने उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है।

बताया जा रहा है कि इस मूल्य वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसी परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। हालांकि, जिस पैमाने पर यह बढ़ोतरी हुई है, उसने बाजार और उपभोक्ता दोनों स्तर पर बहस छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि जब वैश्विक हालात अस्थिर होते हैं, तब ईंधन कंपनियां लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतों में संशोधन करती हैं, लेकिन इतनी तीव्र बढ़ोतरी इस बात को लेकर सवाल खड़े कर रही है कि क्या निजी कंपनियां बाजार के दबाव से अधिक मुनाफे की रणनीति पर भी काम कर रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि Shell India का ईंधन आखिर सरकारी कंपनियों से कितना अलग है। दरअसल, शेल जैसी निजी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जुड़ी होती हैं और अपने प्रीमियम उत्पाद, ब्रांड वैल्यू और सर्विस क्वालिटी के आधार पर कीमतें तय करने में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र होती हैं। वहीं दूसरी ओर Oil and Natural Gas Corporation, Indian Oil Corporation और Hindustan Petroleum Corporation Limited जैसी सरकारी कंपनियां सरकार की नीतियों, टैक्स ढांचे और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए कीमतों में बदलाव करती हैं। इन कंपनियों पर सामाजिक और राजनीतिक दबाव भी अधिक होता है, जिसके चलते वे अक्सर अचानक और बड़ी बढ़ोतरी से बचती हैं।

यही वजह है कि शेल के दाम बढ़ाने का सीधा असर सरकारी कंपनियों की कीमतों पर तुरंत नहीं पड़ता। सरकारी तेल कंपनियां आमतौर पर अपने मूल्य निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये-डॉलर विनिमय दर और सरकारी कर संरचना को आधार बनाती हैं, न कि किसी एक निजी कंपनी के फैसले को। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सरकारी कंपनियां भी कीमतों में संशोधन करने को मजबूर हो सकती हैं। ऐसे में शेल का यह कदम एक संकेत जरूर माना जा रहा है कि बाजार में दबाव बढ़ रहा है।

डीजल की कीमत में 25 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को सबसे ज्यादा गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि डीजल भारत की अर्थव्यवस्था में माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन, निर्माण कार्य, कृषि उपकरण और ग्रामीण आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यदि डीजल महंगा होता है, तो ट्रकों का किराया बढ़ता है, माल की ढुलाई महंगी होती है और अंततः इसका असर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देता है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो वे किराए में संशोधन करने को मजबूर होंगे।

पेट्रोल की कीमत में 7.41 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि भी आम आदमी के लिए किसी बड़ी मार से कम नहीं मानी जा रही। शहरों में नौकरी-पेशा लोग, छोटे कारोबारी, डिलीवरी सेवाओं से जुड़े युवा और टैक्सी चालक सभी इस बढ़ोतरी का असर सीधे महसूस करेंगे। रोजाना दफ्तर आने-जाने वाले मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह फैसला मासिक बजट को और अधिक असंतुलित कर सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे पर तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम बताते हुए सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ईंधन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजी कंपनियों की कीमतों पर भी निगरानी जरूरी है ताकि उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रह सकें। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कुल मिलाकर, Shell India की इस मूल्य वृद्धि ने न केवल महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि निजी और सरकारी तेल कंपनियों के काम करने के तरीके में बड़ा अंतर है। फिलहाल सरकारी कंपनियों पर इसका सीधा असर नहीं दिख रहा, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय दबाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पूरे ईंधन बाजार में कीमतों का नया दौर देखने को मिल सकता है।

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