अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 1 अप्रैल 2026
पूर्व विदेश मंत्री का दावा—मेडिकल यूनिट पर हमला, युद्ध के मानवीय असर पर गहराए सवाल
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री Mohammad Javad Zarif ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हालिया हमलों में एक ऐसी फार्मास्यूटिकल कंपनी को निशाना बनाया गया, जो कैंसर की दवाओं के लिए जरूरी सामग्री तैयार करती थी। इस दावे ने युद्ध के मानवीय पहलू को लेकर नई बहस छेड़ दी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ज़रीफ़ के मुताबिक, जिस यूनिट पर हमला हुआ, उसका किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि से संबंध नहीं था और वह पूरी तरह चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी हुई थी। उनका कहना है कि ऐसे हमले सीधे तौर पर आम नागरिकों, खासकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को प्रभावित करते हैं, क्योंकि इससे दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की है।
हालांकि, इस आरोप पर अब तक अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर इन देशों का रुख यही रहता है कि उनके हमले केवल रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े ठिकानों तक सीमित होते हैं। ऐसे में ज़रीफ़ का यह दावा हालात को और संवेदनशील बनाता है और तथ्यों की पुष्टि की मांग को तेज करता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो इसका असर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध के नियमों पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। चिकित्सा और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना वैश्विक मानकों के खिलाफ माना जाता है और इससे मानवीय संकट और गहरा सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है और उसका दायरा भी फैलता जा रहा है। पहले ही कई नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचने की खबरें आ चुकी हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ईरान का यह आरोप युद्ध के उस संवेदनशील पहलू को सामने लाता है, जहां सैन्य रणनीति और मानवीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन टूटता नजर आता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस दावे की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच होती है या नहीं, और इसका आगे की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।





