अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कुवैत/मनामा | 1 अप्रैल 2026
अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान संघर्ष का पांचवां हफ्ता, खाड़ी देशों तक पहुंची आग की लपटें
मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब एक खतरनाक मोड़ लेता हुआ खाड़ी देशों तक फैलता नजर आ रहा है। ईरान के कथित ड्रोन हमलों ने कुवैत और बहरीन जैसे अहम देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईंधन टैंकों को निशाना बनाए जाने के बाद वहां भीषण आग भड़क उठी, जिसकी लपटें और धुएं का गुबार दूर-दूर तक देखा गया। वहीं बहरीन में भी एक औद्योगिक परिसर में आग लगने की घटना सामने आई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
कुवैत एयरपोर्ट पर हुआ हमला बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि ईंधन भंडारण क्षेत्र को निशाना बनाना सीधे तौर पर बड़े विस्फोट और व्यापक नुकसान का कारण बन सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के बाद कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरे इलाके को धुएं ने घेर लिया। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर तैनात की गईं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश जारी रही। हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
बहरीन में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। वहां एक अज्ञात कंपनी के परिसर में आग लगने की पुष्टि हुई है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उस स्थान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि यह घटना भी ड्रोन हमले से जुड़ी हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए जांच जारी है। बहरीन की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का सैन्य टकराव लगातार पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है। अब तक यह संघर्ष सीमित इलाकों तक सिमटा हुआ था, लेकिन कुवैत और बहरीन जैसे देशों में हमलों ने यह साफ कर दिया है कि अब यह जंग क्षेत्रीय दायरे से निकलकर व्यापक भू-राजनीतिक संकट में बदल सकती है। खाड़ी क्षेत्र, जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। कुवैत और बहरीन दोनों ही रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश हैं, और यहां किसी भी तरह का हमला पूरे क्षेत्र में तनाव की चिंगारी भड़का सकता है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी तेजी से बढ़ रही है। कई देशों ने संयम बरतने और तत्काल बातचीत शुरू करने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात इस वक्त नियंत्रण से बाहर होते नजर आ रहे हैं।
कुवैत और बहरीन में हुए ये हमले सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक बड़े संकट का संकेत हैं। अब यह साफ हो गया है कि यह संघर्ष सीमित नहीं रहा—बल्कि फैलता हुआ एक क्षेत्रीय युद्ध बनता जा रहा है। अगर जल्द कोई ठोस कूटनीतिक पहल नहीं हुई, तो यह आग पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में ले सकती है।




