राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई/नई दिल्ली | 30 मार्च 2026
महाराष्ट्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे जूनियर डॉक्टरों की हालत को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक लगातार ड्यूटी और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण राज्य में करीब 300 डॉक्टरों ने अपनी सीट छोड़ दी, जबकि 25 डॉक्टरों की मौत की खबर ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कई जगहों पर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों से 24 से 36 घंटे तक लगातार काम लिया जा रहा है। उन्हें न तो पर्याप्त आराम मिल रहा है और न ही काम का संतुलन। इस वजह से डॉक्टर शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थक चुके हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठ रही है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने इसे “शोषण” बताते हुए कहा है कि डॉक्टरों को बिना आराम के लंबी ड्यूटी करने पर मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह स्थिति अब सामान्य नहीं मानी जा सकती और तुरंत सुधार की जरूरत है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मामले को उठाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में डॉक्टरों की भारी कमी है। उनके मुताबिक, 2023 के अंत तक राज्य में 20 हजार से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली थे। ऐसे में जो डॉक्टर काम कर रहे हैं, उन पर जरूरत से ज्यादा बोझ डाल दिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जूनियर डॉक्टर, जो अभी सीखने और ट्रेनिंग के दौर में होते हैं, उन्हें ही सबसे ज्यादा दबाव झेलना पड़ रहा है। कम वेतन, लंबी ड्यूटी और खराब कामकाजी माहौल के कारण कई युवा डॉक्टर तनाव में आ जाते हैं। यही वजह है कि कुछ डॉक्टर बीच में ही पढ़ाई या नौकरी छोड़ने का फैसला कर रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर सीधे मरीजों के इलाज पर पड़ेगा। अब जरूरत इस बात की है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले और डॉक्टरों के काम के घंटे, सुविधाएं और मानसिक स्वास्थ्य पर ठोस कदम उठाए।




