जॉब/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मार्च 2026
देश में डिजिटल कंटेंट पर निगरानी को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। Ministry of Home Affairs (MHA) की हालिया वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान औसतन हर दिन करीब 290 ऑनलाइन पोस्ट हटाए गए। यानी पूरे साल में यह आंकड़ा 1 लाख से अधिक पोस्ट तक पहुंच गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत की गई, जिसके तहत सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल माध्यमों से “आपत्तिजनक” या “खतरनाक” माने गए कंटेंट को हटाने का अधिकार मिला हुआ है। यह अधिकार हाल के वर्षों में और अधिक सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया है।
गृह मंत्री Amit Shah के नेतृत्व वाले मंत्रालय को पिछले वर्ष ही इस तरह के कंटेंट को सीधे ब्लॉक या हटाने की प्रक्रिया में अधिक ताकत दी गई थी। उसी के बाद से कंटेंट हटाने की रफ्तार में तेज़ी देखी गई है।
सरकार का कहना है कि ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए उठाए गए हैं। वहीं, इस पर बहस भी तेज हो गई है—कुछ विशेषज्ञ और संगठनों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सरकार के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, खासकर इस बात पर कि किन मानकों के आधार पर पोस्ट हटाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता कितनी है। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि भारत में ऑनलाइन कंटेंट पर सरकारी निगरानी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सख्त और सक्रिय हो गई है।




