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सोशल मीडिया पर ऐतिहासिक फैसला: अदालत ने Meta और YouTube को ठहराया लापरवाह, 25 करोड़ का मुआवजा

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लॉस एंजिल्स | 26 मार्च 2026

अमेरिका के Los Angeles Superior Court से एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने दुनिया भर की सोशल मीडिया कंपनियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अदालत की जूरी ने Meta Platforms और YouTube को एक 20 वर्षीय युवती की मानसिक स्थिति बिगाड़ने के मामले में लापरवाही का दोषी ठहराया है।

यह मामला एक युवती (जिसे कोर्ट में के.जी.एम. या कैली के नाम से जाना गया) द्वारा दायर किया गया था। उसने आरोप लगाया कि बचपन से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की लत ने उसकी जिंदगी पर गहरा असर डाला। उसके मुताबिक, उसने मात्र 6 साल की उम्र में YouTube का इस्तेमाल शुरू किया और 9 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते Instagram (जो Meta का हिस्सा है) उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।

युवती ने अदालत को बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन—जैसे अनंत स्क्रॉल, ऑटो-प्ले वीडियो और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस—ने उसे स्क्रीन से बांधे रखा। धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल गई, जिससे उसे डिप्रेशन, एंग्जायटी और बॉडी डिसमॉर्फिया जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।

करीब 9 दिनों तक चली सुनवाई और 44 घंटे की लंबी विचार-विमर्श के बाद जूरी ने माना कि दोनों कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और संचालन में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती। जूरी ने यह भी स्पष्ट कहा कि इस लापरवाही ने युवती को नुकसान पहुंचाने में “महत्वपूर्ण भूमिका” निभाई। अदालत ने कुल 3 मिलियन डॉलर (लगभग 25 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसमें Meta को 70% और YouTube को 30% जिम्मेदार ठहराया गया है।

यह मुकदमा केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि हजारों ऐसे मामलों के लिए “टेस्ट केस” माना जा रहा है, जिनमें परिवार, स्कूल और सरकारी संस्थाएं सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगा रही हैं। सुनवाई के दौरान Meta के प्रमुख Mark Zuckerberg सहित कई अधिकारियों की गवाही भी दर्ज की गई।

हालांकि, Meta ने इस फैसले से असहमति जताते हुए कहा है कि वह कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। कंपनी का तर्क है कि युवती की समस्याएं उसके पारिवारिक हालात से जुड़ी थीं, न कि प्लेटफॉर्म्स से। वहीं, वादी पक्ष के वकीलों ने इसे “ऐतिहासिक पल” बताते हुए कहा कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम है।

अब अदालत में “पनिशमेंट डैमेज” यानी अतिरिक्त दंडात्मक मुआवजे पर भी फैसला होना बाकी है। माना जा रहा है कि यदि यह राशि भी जुड़ती है, तो यह मामला सोशल मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

यह फैसला साफ संकेत देता है कि डिजिटल दुनिया में अब केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है—खासकर तब, जब बात बच्चों और किशोरों के भविष्य की हो।

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