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पश्चिम एशिया का युद्ध बना किसानों की मुसीबत, बासमती चावल का निर्यात ठप, मध्य प्रदेश में बढ़ा संकट

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व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 24 मार्च 2026

पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध अब भारत के किसानों के लिए भी परेशानी बनता जा रहा है। खास तौर पर मध्य प्रदेश के वे किसान, जो बासमती चावल उगाते हैं, इस हालात से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। जिन देशों में भारत से बासमती चावल भेजा जाता था, वहां तनाव और अस्थिरता के कारण निर्यात लगभग रुक गया है। इसका सीधा असर किसानों और व्यापारियों की आमदनी पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बासमती चावल के दाम तेजी से गिर गए हैं। किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा। बाजार में कीमत करीब 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक कम हो गई है, जिससे किसानों की मेहनत का फायदा उन्हें नहीं मिल रहा और घाटा बढ़ता जा रहा है।

निर्यात में एक और बड़ी दिक्कत कंटेनरों की कमी और बढ़ा हुआ किराया है। पहले जो कंटेनर लगभग 2500 डॉलर में मिल जाता था, अब उसका खर्च 3000 डॉलर से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे व्यापारियों का खर्च बढ़ गया है और वे भी नए सौदे करने से बच रहे हैं।

स्थिति यह है कि कई जगहों पर चावल की खेप बंदरगाहों पर ही अटकी हुई है। भुगतान में देरी हो रही है, जिससे मिल मालिक और कारोबारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं। इसका असर किसानों पर साफ दिख रहा है, क्योंकि बाजार में खरीद कम हो गई है और पुराना स्टॉक बिक नहीं पा रहा। यह साफ है कि युद्ध का असर अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव और खेती तक पहुंच गया है। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में किसानों और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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