राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | दिसपुर (गुवाहाटी) | 20 मार्च 2026
पहली सूची और बड़ा सियासी झटका
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी की पहली उम्मीदवार सूची आते ही पार्टी के भीतर जैसे भूचाल आ गया है। 88 उम्मीदवारों की इस सूची में करीब 30 ऐसे चेहरे शामिल हैं जो पहले कांग्रेस में रह चुके हैं। इनमें प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर से और भूपेन कुमार बोराह को बिहपुरिया से टिकट दिया गया है। वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद जलुकबारी से मैदान में उतर रहे हैं। लेकिन इस सूची ने पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को झकझोर कर रख दिया है, क्योंकि कई सिटिंग विधायकों और वरिष्ठ चेहरों को टिकट से बाहर कर दिया गया है।
दिसपुर में बढ़ता गुस्सा और खुला विरोध
गुवाहाटी के दिसपुर इलाके में बीजेपी के वजपेयी भवन के आसपास हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। पार्टी के ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत कुमार दास ने खुलकर नाराजगी जताई और यहां तक कह दिया कि अगर मुख्यमंत्री दिसपुर आए तो स्थिति बिगड़ सकती है। यह बयान अपने आप में दिखाता है कि मामला सिर्फ असंतोष तक सीमित नहीं, बल्कि अब खुली बगावत की तरफ बढ़ रहा है। कार्यालय के बाहर नारेबाजी, धक्का-मुक्की और तोड़फोड़ की खबरों ने बीजेपी के अंदरूनी संकट को उजागर कर दिया है।
पुराने कार्यकर्ताओं का फूटता गुस्सा
बीजेपी के पुराने आरएसएस पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और निष्ठा के बावजूद उन्हें किनारे कर दिया गया, जबकि दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। बीजेपी युवा मोर्चा के कई पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे देकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कुछ नेता खुलेआम पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और भाषा भी बेहद तीखी हो गई है।
कांग्रेस का दांव और युवाओं पर भरोसा
जहां बीजेपी अंदरूनी कलह से जूझ रही है, वहीं कांग्रेस ने इस मौके को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी ने युवाओं पर भरोसा जताते हुए आईवाईसी बैकग्राउंड वाले करीब 10 नए चेहरों को टिकट दिया है। इससे कांग्रेस खेमे में उत्साह देखने को मिल रहा है और वे इसे बीजेपी की कमजोरी के तौर पर पेश कर रहे हैं।
दिल्ली तक पहुंची हलचल
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है। अमित शाह खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल दिल्ली से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष है और यह आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
इमरजेंसी बैठक, लेकिन ठंडा नहीं पड़ा गुस्सा
गुवाहाटी में देर रात मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आपात बैठक बुलाकर हालात संभालने की कोशिश की। कार्यकर्ताओं को समझाने और नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश हुई, लेकिन अंदर का आक्रोश अभी भी कम होता नजर नहीं आ रहा। कई नेता अब भी चुप नहीं हैं और खुले तौर पर अपनी बात रख रहे हैं।
आगे की राह और बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी इस आंतरिक संकट को समय रहते संभाल पाएगी या यह असंतोष चुनावी नतीजों पर असर डालेगा। असम की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहां एक तरफ सत्ता बचाने की चुनौती है और दूसरी तरफ अपने ही घर को संभालने की जंग। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह तूफान थमता है या और बड़ा रूप लेता है।




