राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 मार्च 2026
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने एक बार फिर केंद्र सरकार की कृषि नीतियों पर सवाल उठाए हैं। संसद में कृषि मंत्रालय से जवाब मांगते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल खेती-बाड़ी को लेकर जो बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं की गई थीं, उनका वास्तविक असर कहीं दिखाई नहीं देता।
राहुल गांधी ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि कपास उत्पादन में गिरावट साफ नजर आ रही है। उनके मुताबिक, 2020-21 में कपास का उत्पादन 35.2 मिलियन मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में घटकर 29.7 मिलियन मीट्रिक टन रह गया है। इसी तरह दलहन उत्पादन में भी कोई खास प्रगति नहीं हुई है—2020-21 में जहां उत्पादन 25.5 मिलियन मीट्रिक टन था, वहीं 2024-25 में यह सिर्फ 25.7 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच पाया।
उन्होंने कहा कि इन हालातों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर पड़ रहा है। उत्पादन में ठहराव और गिरावट के कारण भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे किसानों को विदेशी उत्पादों से मुकाबला करना पड़ता है और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ता है।
राहुल गांधी ने मखाना बोर्ड को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बड़े प्रचार के साथ घोषित इस योजना की हालत भी खराब है। अब तक घोषित राशि का महज करीब 5 प्रतिशत यानी लगभग 27 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं और बोर्ड का स्थान तक तय नहीं हो पाया है। इसे उन्होंने “घोषणाओं की राजनीति” का उदाहरण बताया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि योजनाएं और बजट जमीनी जरूरतों के बजाय केवल दिखावे के लिए तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार किसानों के साथ हो रही इस तरह की उपेक्षा से यह साफ हो गया है कि सरकार की प्राथमिकताओं में कृषि क्षेत्र गंभीरता से शामिल नहीं है।
इस बयान के बाद एक बार फिर देश में कृषि नीतियों, उत्पादन के आंकड़ों और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।




