Home » Science & Tech » भारत में चिकित्सा विज्ञान की क्रांति: पहली बार बिना सर्जरी हृदय वाल्व बदला गया, बांह की नस से हुई सफल प्रक्रिया

भारत में चिकित्सा विज्ञान की क्रांति: पहली बार बिना सर्जरी हृदय वाल्व बदला गया, बांह की नस से हुई सफल प्रक्रिया

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

भारत में चिकित्सा तकनीक ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। जयपुर के राजस्थान अस्पताल में डॉ. रविंद्र सिंह राव और उनकी अनुभवी टीम ने देश का पहला Percutaneous Trans-Axillary TAVI सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस प्रक्रिया में मरीज के हृदय का क्षतिग्रस्त वाल्व बिना पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी के, केवल बांह की नस (सबक्लावियन आर्टरी) से पहुंचाकर बदला गया। यह तकनीक अत्यंत उच्च कौशल और सटीकता की मांग करती है और अब तक भारत में किसी अस्पताल में नहीं अपनाई गई थी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने हृदय रोगियों के लिए जीवनदान देने वाली एक नई राह खोल दी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी मुख्य (फेमोरल) धमनी ब्लॉक हो या जो ओपन सर्जरी के जोखिम नहीं उठा सकते।

इस प्रक्रिया के पहले लाभार्थी रहे 78 वर्षीय एक बुजुर्ग, जिनके पैरों की धमनियाँ पूरी तरह ब्लॉक हो चुकी थीं और जिनका दिल महज 25% क्षमता पर काम कर रहा था। ओपन सर्जरी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती थी, लेकिन ट्रांस-एक्सिलरी TAVI के माध्यम से उनकी जान बचाई गई। महज 5 दिनों में वे अस्पताल से छुट्टी लेकर स्वस्थ लौट गए। डॉक्टरों के अनुसार, यह तकनीक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में भी पहली बार इस रूप में अपनाई गई है, और आने वाले समय में यह लाखों रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकती है।

यह सफलता केवल एक चिकित्सा चमत्कार नहीं, बल्कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की उन्नति, चिकित्सकों की विशेषज्ञता और नवाचार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह घटनाक्रम भारतीय कार्डियोलॉजी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने योग्य है और एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है—जहां सर्जरी अब जरूरी नहीं, बल्कि विकल्प बनती जा रही है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments