अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/कुआलालंपुर | 17 मार्च 2026
अमेरिका की व्यापार नीतियों को बड़ा झटका देते हुए मलेशिया ने अमेरिका के साथ हुए अपने व्यापार समझौते को अमान्य घोषित कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस अहम निर्णय के बाद लिया गया है, जिसमें ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) को खारिज कर दिया गया था। मलेशिया के निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्री जौहरी गनी ने साफ कहा कि इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच हुआ समझौता अब व्यावहारिक और कानूनी रूप से प्रभावी नहीं रह गया है।
दरअसल, अमेरिका और मलेशिया के बीच 26 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता हुआ था, जिसके तहत टैरिफ दरों को 47% से घटाकर 24% और फिर 19% तक लाने पर सहमति बनी थी। साथ ही कुछ उत्पादों पर शून्य शुल्क लागू करने और अमेरिकी कंपनियों को मलेशियाई बाजार में अधिक पहुंच देने जैसे प्रावधान भी शामिल थे। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस पूरे समझौते की बुनियाद को ही कमजोर कर दिया।
फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस कारणों के टैरिफ लागू नहीं किए जा सकते। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने सभी देशों पर 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया, जिसे आगे बढ़ाकर 15% करने की योजना जताई गई। इस फैसले ने पहले से हुए द्विपक्षीय समझौतों की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मलेशिया का यह कदम एक ट्रेंड की शुरुआत हो सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, जब सभी देशों पर समान टैरिफ लागू किया जा रहा है, तो विशेष व्यापार समझौतों का आर्थिक लाभ खत्म हो जाता है। ऐसे में कई देशों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे राजनीतिक और आर्थिक रियायतें देकर भी इन समझौतों को क्यों जारी रखें।
इसके अलावा, अमेरिका द्वारा लगातार नए व्यापारिक जांच शुरू किए जाने से भी असंतोष बढ़ा है। हाल ही में अमेरिका ने भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान समेत कई देशों के खिलाफ व्यापार से जुड़े मामलों में जांच शुरू की है। इससे यह संकेत मिलता है कि समझौते होने के बावजूद व्यापारिक दबाव कम नहीं हो रहा, बल्कि और बढ़ रहा है।
मलेशिया का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक व्यापार पहले ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीति और बदलते रुख के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अगर अन्य देश भी इसी रास्ते पर चलते हैं, तो वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
भारत और अमेरिका के बीच भी हाल ही में एक प्रारंभिक व्यापार समझौते की घोषणा हुई थी, जिसमें टैरिफ घटाने पर सहमति बनी है, लेकिन इसके अंतिम स्वरूप और समयसीमा को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। मलेशिया का यह फैसला न केवल अमेरिका के लिए कूटनीतिक और आर्थिक झटका है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत भी देता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या अन्य देश भी इसी राह पर चलते हैं और क्या यह घटनाक्रम किसी बड़े वैश्विक ट्रेड संघर्ष की भूमिका तैयार कर रहा है।




