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मनरेगा खत्म करने की जल्दबाज़ी पर घिरी मोदी सरकार: कानून पास, लेकिन नियम अब भी अधूरे

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 9 मार्च 2026

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त कर नई ग्रामीण रोजगार योजना लाने के फैसले पर अब सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने दिसंबर 2025 में संसद से जल्दबाज़ी में कानून पास करवा लिया, लेकिन आज तक उसके नियम और क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार नहीं कर पाई है।

दो दिन में खत्म हुआ मनरेगा का कानून

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने महज़ दो दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों से Viksit Bharat Grameen Rozgar and Aajeevika Mission Guarantee Act को पारित करा लिया। यह कानून देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act यानी मनरेगा की जगह लाने के लिए लाया गया था।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस फैसले से पहले राज्यों से कोई गंभीर चर्चा नहीं की और न ही इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर कानून पास किया गया।

अब हो रही हैं वही बैठकें जो पहले होनी चाहिए थीं

जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने उस समय दावा किया था कि नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा, इसलिए उसे तत्काल पास करना जरूरी था। लेकिन अब सामने आ रही रिपोर्टों से पता चल रहा है कि सरकार अभी भी राज्यों के साथ बैठकर योजना के नियम और ढांचे को तय कर रही है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो परामर्श और तैयारी पहले होनी चाहिए थी, वह अब की जा रही है।

“पहले घोषणा, बाद में सोच”—कांग्रेस का हमला

कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार की कार्यशैली को लेकर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह “फास्ट गवर्नेंस” का उदाहरण है—
“First Announce, Subsequently Think” यानी पहले घोषणा कर दी जाती है और बाद में उसके बारे में सोचा जाता है।

नए कानून के सामने कई प्रशासनिक चुनौतियाँ

सूत्रों के मुताबिक नई योजना को लागू करने से पहले कई महत्वपूर्ण नियमों को अंतिम रूप देना बाकी है। इनमें राज्यों के लिए फंड आवंटन का फार्मूला, ग्राम पंचायतों की श्रेणी तय करना, सामाजिक ऑडिट की व्यवस्था और डिजिटल भुगतान प्रणाली जैसे कई अहम पहलू शामिल हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इन सभी पहलुओं पर राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा की जा रही है। यही वजह है कि अभी तक नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार

मनरेगा जैसे बड़े सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम को खत्म कर नई योजना लाने के फैसले को लेकर पहले ही विपक्ष सरकार को घेर रहा है। अब जब कानून पास होने के महीनों बाद भी उसके नियम तय नहीं हो पाए हैं, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर और ज्यादा गरमाने की संभावना है।

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