एबीसी नेशनल न्यूज | टोरंटो | 8 फरवरी 2026
दुनिया की सबसे चर्चित गोल्ड चोरी की गुत्थी अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है। 400 किलो सोने की सनसनीखेज चोरी का मुख्य आरोपी सिमरनप्रीत आज भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर है, जबकि इस मामले की जांच में कनाडा में अब तक करीब 32 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। तीन साल तक चली जांच, दर्जनों छापे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैली पड़ताल के बावजूद सिमरनप्रीत का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है। इस बीच, मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब चोरी के पीछे बताए जा रहे पाकिस्तानी मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इससे भी मुख्य आरोपी तक पहुंचने का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है।
यह मामला उस वक्त सामने आया था जब कनाडा के एक सुरक्षित कार्गो टर्मिनल से भारी मात्रा में सोना रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। शुरुआती जांच में इसे अंदरूनी मिलीभगत का मामला माना गया, क्योंकि इतनी बड़ी चोरी बिना पुख्ता योजना और नेटवर्क के संभव नहीं थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि सिमरनप्रीत इस पूरे ऑपरेशन का अहम चेहरा था, जिसने स्थानीय स्तर पर चोरी को अंजाम दिया, जबकि साजिश की डोरें अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी थीं।
कनाडा पुलिस और अन्य एजेंसियों ने इस मामले में तीन साल के दौरान सैकड़ों लोगों से पूछताछ की, कई देशों में कानूनी मदद के तहत सूचनाएं मांगीं और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। बावजूद इसके, सिमरनप्रीत लगातार जांच एजेंसियों से एक कदम आगे निकलता रहा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने पहचान बदलने, डिजिटल निशान मिटाने और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की मदद से खुद को पूरी तरह छिपा लिया है। यही वजह है कि इतने बड़े खर्च और प्रयासों के बाद भी जांच किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
हाल ही में इस मामले में एक अहम सफलता तब मिली, जब चोरी के पीछे कथित तौर पर साजिश रचने वाले पाकिस्तानी मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह शख्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की तस्करी और अवैध खरीद-फरोख्त के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनसे यह साफ हुआ कि चोरी सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके तार कई देशों से जुड़े थे। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोरी किया गया 400 किलो सोना कहां छिपाया गया है या उसे किन रास्तों से खपाया गया।
इस पूरे मामले ने कनाडा की सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों और विशेषज्ञों का कहना है कि जब इतने बड़े पैमाने पर संसाधन और पैसा खर्च होने के बावजूद मुख्य आरोपी पकड़ा नहीं जा सका, तो जांच के तरीकों की समीक्षा जरूरी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि यह एक बेहद जटिल अंतरराष्ट्रीय अपराध है, जिसमें समय लगना स्वाभाविक है और जांच अब भी जारी है।
फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि गिरफ्तार पाकिस्तानी मास्टरमाइंड की पूछताछ से क्या सिमरनप्रीत तक पहुंचने का कोई ठोस सुराग मिलता है या नहीं। 400 किलो सोना अब भी रहस्य बना हुआ है और यह मामला दुनिया के सबसे पेचीदा और महंगे अपराध मामलों में गिना जाने लगा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि देर-सबेर सच्चाई सामने आएगी, लेकिन सवाल यही है—आखिर सिमरनप्रीत कहां छिपा है?




