एबीसी नेशनल न्यूज | 8 फरवरी 2026
वरिष्ठ अभिनेता और रंगमंच की दुनिया के बड़े नाम नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनका बयान देश के प्रतिष्ठित नाट्य संस्थान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) को लेकर है। नसीरुद्दीन शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि वह खुद को कोई “सर्वज्ञानी” या “सब कुछ जानने वाला” आदमी नहीं मानते।
“पढ़ाने वही लौटते हैं, जिन्हें खुद मंच पर बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ”
एक इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने NSD की शिक्षण परंपरा पर तीखी लेकिन सोचने पर मजबूर करने वाली टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अक्सर वही लोग पढ़ाने लौटते हैं, जिन्हें खुद अभिनय या रंगमंच के क्षेत्र में वह सफलता नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। उनके शब्दों में, “मैं खुद को इतना बड़ा नहीं मानता कि कहूं मुझे सब आता है। सीखना एक उम्र भर चलने वाली प्रक्रिया है।”
अनुभव बनाम अहंकार
नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि कला में अहंकार सबसे बड़ा दुश्मन होता है। अगर कोई यह मान ले कि वह सब कुछ जानता है, तो वहीं से उसकी रचनात्मक यात्रा रुक जाती है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि केवल किसी संस्थान में पढ़ा देना ही किसी कलाकार की महानता का प्रमाण नहीं होता, बल्कि असली कसौटी उसका काम और निरंतर अभ्यास है।
NSD और रंगमंच पर बहस फिर तेज
नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद एक बार फिर NSD की भूमिका, वहां की शिक्षण पद्धति और गुरु-शिष्य परंपरा पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग उनके बयान को कड़वा सच बता रहे हैं, तो कुछ इसे जरूरत से ज्यादा कठोर मान रहे हैं। लेकिन यह तय है कि इस टिप्पणी ने रंगमंच की दुनिया में आत्ममंथन की एक नई बहस को जन्म दिया है।
“सीखना कभी खत्म नहीं होता”
अपने बयान के जरिए नसीरुद्दीन शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को आज भी एक सीखने वाला कलाकार मानते हैं। उनके मुताबिक, अभिनय हो या जीवन—जो यह मान ले कि उसे सब आता है, वही सबसे ज्यादा पीछे रह जाता है।
नसीरुद्दीन शाह का यह बयान सिर्फ NSD तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कला जगत के लिए एक आईना है—जहां ज्ञान से ज्यादा विनम्रता, ईमानदार अनुभव और लगातार सीखते रहने की ललक सबसे बड़ी पूंजी मानी जाती है।




