एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 7 फरवरी 2026
कांग्रेस ने अमेरिका के साथ हुई कथित ट्रेड डील को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि इस समझौते पर जॉइंट स्टेटमेंट सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करते हुए अमेरिका के दबाव में आकर भारत को भारी नुकसान पहुंचाने वाली डील पर हामी भर दी। कांग्रेस के अनुसार, यह समझौता न तो किसानों के हित में है, न व्यापारियों के और न ही देश के उद्योगों के लिए, बल्कि पूरी तरह अमेरिका के फायदे की डील है।
कांग्रेस का दावा है कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारत से 18 प्रतिशत तक टैरिफ वसूलेगा, जबकि पहले यह दर 3 प्रतिशत से भी कम थी। इसके उलट, भारत अमेरिका से आने वाले सामानों पर या तो टैरिफ पूरी तरह खत्म कर देगा या फिर उसे बेहद कम कर देगा। पार्टी के मुताबिक यह असमान शर्तें भारत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं और इससे घरेलू बाजार पर सीधा असर पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला भारत की व्यापारिक संप्रभुता को कमजोर करने वाला है।
कृषि क्षेत्र को लेकर कांग्रेस ने सबसे गंभीर चिंता जताई है। पार्टी के अनुसार, अमेरिका से आने वाले खेती से जुड़े कई उत्पादों पर भारत अब टैरिफ नहीं लगाएगा। इसमें अमेरिकी फल, dried distillers’ grains (DDGs), पशु चारे के लिए लाल ज्वार और ड्राई फ्रूट जैसे उत्पाद शामिल हैं। कांग्रेस का कहना है कि इन उत्पादों पर टैरिफ हटने से भारतीय किसानों को सीधा नुकसान होगा, क्योंकि सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में भर जाएंगे और स्थानीय किसानों की उपज को उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि भारत सरकार अमेरिकी फूड और कृषि उत्पादों पर लागू नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाने पर भी सहमत हो गई है। इसका मतलब यह है कि भारत अपने बाजार को लगभग पूरी तरह अमेरिका के लिए खोल रहा है। पार्टी के मुताबिक, इससे न केवल कृषि बल्कि खाने-पीने से जुड़े घरेलू उद्योगों को भी गहरा झटका लगेगा। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत जैसे नारों को इस डील के जरिए खुद ही कमजोर कर दिया है।
उद्योग और निर्यात के मोर्चे पर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी के अनुसार, भारत के कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, घर की सजावट का सामान, कारीगर उत्पाद और मशीनरी जैसे सेक्टरों पर अमेरिका 18 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। कांग्रेस का कहना है कि इससे भारत का निर्यात महंगा होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे, जिसका सीधा असर रोजगार और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ेगा।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने Donald Trump के साथ यह करार किया है कि भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। इसमें अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद जैसे तेल और गैस, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट, कृषि उत्पाद और कोयला शामिल हैं। पार्टी के मुताबिक, यह शर्त भारत को एक बड़े आयातक की भूमिका में धकेल देगी और घरेलू उत्पादन को और कमजोर करेगी।
कांग्रेस का कहना है कि कुल मिलाकर यह ट्रेड डील पूरी तरह अमेरिका के हित में है और भारत के लिए “भयंकर नुकसान” लेकर आने वाली है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों, व्यापारियों और छोटे उद्योगों के हितों का जरा भी ध्यान नहीं रखा और भारत का पूरा बाजार अमेरिका को सौंप दिया। कांग्रेस का दावा है कि यह सब इसलिए किया गया क्योंकि प्रधानमंत्री पर “एप्सटीन फाइल्स” को लेकर जबरदस्त दबाव है और वे किसी भी कीमत पर खुद को बचाना चाहते हैं।
कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन Pawan Khera ने बयान में कहा कि भारत सरकार अमेरिका के टाइम ज़ोन के हिसाब से फैसले ले रही है और देश की नीतियां वाशिंगटन के मुताबिक तय हो रही हैं। उन्होंने कहा कि डील सामने बैठकर बराबरी से नेगोशिएट की जाती है, लेकिन “कनपटी पर बंदूक रखकर, ब्लैकमेल कर जो करवाया जाए, वह डील नहीं बल्कि सरेंडर होता है।” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा—“नाम नरेंद्र, काम सरेंडर।”
कांग्रेस ने इसे देश के लिए बेहद खेदजनक करार देते हुए कहा कि इस तरह के फैसले भारत की आर्थिक आज़ादी और भविष्य दोनों के लिए खतरा हैं। पार्टी ने मांग की है कि सरकार इस ट्रेड डील की पूरी जानकारी संसद और देश के सामने रखे और बताए कि आखिर किस मजबूरी में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया।




